राहुल गांधी की रैली
साल 2021 का चुनाव कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहा। वाम मोर्चा के साथ गठबंधन में उतरने के बावजूद, कांग्रेस को राज्य में कुल वोटों का 8.7% ही मिला और गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिल सकी। लेकिन अब राहुल गांधी की रैली के जरिए पार्टी ने सटीक रणनीति और वोटरों को साधने का प्रयास शुरू कर दिया है। और पार्टी ने टिकट वितरण में जातिगत और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा है।
दिनाजपुर में पहली रैली
राहुल गांधी की पहली रैली उत्तरी दिनाजपुर के रायगंज में है, जहां मुर्शिदाबाद चुनाव रणनीति और पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अपने पुराने गढ़ को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2016 में कांग्रेस-वाम गठबंधन ने 9 में से 5 सीटें जीती थीं, लेकिन 2021 में यहां कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 9 में से 7 सीटें जीत लीं।
मालदा में नई कोशिश
राहुल गांधी की दूसरी रैली मालदा जिले में होगी। मालदा अपनी आम की खेती और मुस्लिम बहुल आबादी के लिए जाना जाता है। 2016 में कांग्रेस ने यहां 8 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2021 में पूरी तरह से पिछड़ गई। इस बार कांग्रेस का प्रयास है कि पुराने गढ़ को दोबारा मजबूत किया जाए।
अधीर रंजन के जरिए पैठ
तीसरी रैली मुर्शिदाबाद जिले में होगी। पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस को 0 सीट मिली थी, जबकि टीएमसी ने 22 में से 20 और बीजेपी ने 2 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने इस बार अपने वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर से मैदान में उतारा है। उनका मकसद जिले में कांग्रेस की स्थिति को सुधारना है।
कांग्रेस की नई रणनीति
कांग्रेस अब सीधे सत्ता की दौड़ में नहीं, बल्कि अपनी स्थिति सुधारने में लगी है। पार्टी उन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रही है जहां सुधार की सबसे ज्यादा संभावना है। राहुल गांधी की रैलियों का उद्देश्य वोटरों को मनाना और पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करना है। पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी और बीजेपी मुख्य खिलाड़ी बन चुके हैं और कांग्रेस को तीसरे स्थान की चुनौती को स्वीकार करना होगा।
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