राहुल गांधी की सक्रियता और रणनीति
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शनों को प्रभावी बनाने के लिए संगठन और रणनीति के दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी के नेताओं के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शन में शामिल सांसदों की उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित किया, सहयोगी दलों के नेताओं से प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित किया और छात्र संगठनों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का प्रयास किया।
कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी की सक्रियता ने INDIA गठबंधन के दलों की भागीदारी को प्रदर्शनों में बढ़ाने में मदद की है। इस बार, कांग्रेस ने छोटे सहयोगी दलों को भी अपने साथ लेकर चलने पर जोर दिया, जिससे केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को व्यापक बनाया जा सका।
प्रदर्शनों में राहुल गांधी का नेतृत्व
राहुल गांधी पिछले सप्ताह से चल रहे प्रदर्शनों में कांग्रेस की रणनीति के मुख्य चेहरे के रूप में उभरे हैं। पार्टी के नेताओं के अनुसार, वह देर रात तक अपनी टीम के साथ बैठकें कर रहे थे, जिसमें उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कई नेता शामिल थे।
कांग्रेस सांसद और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि राहुल गांधी लंबे समय से SIR और निर्वाचन आयोग में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, हालिया खुलासों के बाद पार्टी में यह धारणा मजबूत हुई है कि राहुल गांधी सही सवाल उठा रहे हैं।
गैरहाजिर सांसदों की निगरानी
रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ नियमित बैठकें कर रहे थे, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, श्रीवत्स, अलंकार सवाई, केबी बायजू और केसी वेणुगोपाल शामिल थे। इन बैठकों में एक महत्वपूर्ण निर्णय उन कांग्रेस सांसदों को संदेश देने का था, जो शुरुआती प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए थे।
पहले दिन INDIA गठबंधन के सांसदों ने निर्वाचन आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जबकि दूसरे दिन विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाला। राहुल गांधी ने वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया।
कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास
प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर भी तैयारी की। पार्टी ने रविवार रात को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए दिल्ली स्थित अपने अकबर रोड कार्यालय को खोला।
रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा से सबसे अधिक कार्यकर्ता पहुंचे, जहाँ के कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने कार्यकर्ताओं के ठहरने की व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश के सांसदों ने भी इसी तरह की सहायता की। इससे पहले, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा और जयराम रमेश ने विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को फोन करके दिल्ली पहुंचने के लिए कहा था।
सहयोगी दलों के साथ समन्वय
राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के सहयोगियों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी संपर्क किया ताकि सहयोगी दलों को प्रदर्शन में शामिल किया जा सके।
उनकी इस पहल के पीछे एक स्पष्ट मंशा थी कि विभिन्न दलों के बीच एकजुटता बढ़ाई जाए, जिससे सरकार के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार किया जा सके।





