हाई कोर्ट का सीबीआई जांच का आदेश
भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया जाएगा।
हाई कोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के लक्षण पाए गए हैं।
विपक्ष का हमला
इस दौरान, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए उसकी भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर सवाल उठाए। भाजपा के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से तुरंत इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के 'भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने' के दावे की वास्तविकता को उजागर कर दिया है।
पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष परगट सिंह ने भी हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने 'एक्स' पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा, "मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में माननीय हाई कोर्ट के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयसीमा में हो।"
शिरोमणि अकाली दल की प्रतिक्रिया
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी हाई कोर्ट के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे सरकार का असली चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, "गुरु-द्रोही मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी की संलिप्तता वाले पैसे लेकर पद देने के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के हाई कोर्ट के निर्णय ने इस सरकार की असलियत को सामने ला दिया है।"
मुख्यमंत्री का बयान
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरदूलगढ़ में आयोजित 'मिनी मिलनी' कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार जनहित की योजनाओं को जारी रखेगी, जिनमें महिलाओं के लिए 'मावां धीयां सत्कार योजना', मुफ्त बिजली और योग्यता के आधार पर भर्ती शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल के पास पंजाब के लिए कोई ठोस दृष्टिकोण नहीं है।





