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भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद संघ में भी संभावित परिवर्तन

भाजपा ने अपने संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसके बाद संघ में भी बड़े परिवर्तन की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए संघ अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहा है।

भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद संघ में भी संभावित परिवर्तन
फोटो: भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद संघ में भी संभावित परिवर्तन

भाजपा में नए नेतृत्व के तहत बदलाव

भाजपा ने अपने संगठन में नई टीम के माध्यम से देश की बदलती राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया का एक प्रमुख पहलू नए नेतृत्व को निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करना है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे, जिनसे आवश्यक सलाह और मदद ली जा सकेगी।


राजनीतिक दलों में समय-समय पर पीढ़ीगत बदलाव होते रहते हैं, और अब संघ में भी ऐसे बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, संघ प्रमुख में बदलाव की चर्चा अभी तक सामने नहीं आई है।


भाजपा की युवा नेतृत्व की दिशा

सामान्यतः विपक्षी दलों के संदर्भ में बदलाव के लिए अनुकूल वातावरण माना जाता है, लेकिन भाजपा ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ इस बदलाव की प्रक्रिया को शुरू किया है। युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम में युवाओं के साथ-साथ अनुभवी नेताओं को भी समाहित किया है, लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता युवाओं को दी गई है।


भाजपा के गठन के बाद से हर दशक में संगठनात्मक परिवर्तन होते आए हैं। विशेष रूप से 1990 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी ने बड़ी संख्या में युवाओं को संगठन में शामिल किया था, जिसमें वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।


संघ में संभावित बदलाव

भाजपा के हालिया बदलावों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले वर्ष महत्वपूर्ण परिवर्तन होने की उम्मीद है। 'कॉकरोच प्रोटेस्ट' के परिणामस्वरूप जेन-जी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में इन बदलावों की ओर संकेत भी दिए हैं।


नई पीढ़ी के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए भाजपा ने जेन-जी और जेन-अल्फा को ध्यान में रखते हुए अपनी कार्यप्रणाली को नया स्वरूप देने का निर्णय लिया है। हालांकि संघ प्रमुख मोहन भागवत के पद में बदलाव की कोई चर्चा नहीं है, जो 2009 से इस पद पर हैं। संघ में सरसंघचालक के लिए कोई चुनाव नहीं होता है, और यह पूरी तरह से आम सहमति पर निर्भर करता है।