दिल्ली में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शनों की तैयारियां
दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है। बीजेपी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' के तहत 1 नवंबर को पदयात्राओं की घोषणा की है, जिसका जवाब कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल उठाकर दिया है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में दिल्ली पुलिस मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम की तैयारियों को बाधित कर रही है।
व्यापारियों के नुकसान पर पवन खेड़ा का पलटवार
व्यापारिक संगठन 'चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने त्योहारी सीजन में विपक्ष की रैली से 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका को लेकर चिंता जताई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने सवाल किया कि क्या बीजेपी के प्रदर्शन से व्यापारियों को लाभ होगा, जबकि कांग्रेस की रैली से नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट रूप से दोहरा मापदंड है। क्या बीजेपी का प्रदर्शन कारोबार को बढ़ावा देता है और विपक्ष का मार्च घाटा लाता है? लोकतंत्र की रक्षा की इस लड़ाई में आम जनता और व्यापारी भी शामिल हो रहे हैं।'
पुलिस की कार्रवाई पर वेणुगोपाल का आरोप
के. सी. वेणुगोपाल ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, कांग्रेस ने 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान की बुकिंग कराई थी और प्रशासन से अनुमति भी प्राप्त की थी। लेकिन जब रविवार को टेंट लगाने के लिए लोग पहुंचे, तो दिल्ली पुलिस ने काम रुकवा दिया।
उन्होंने कहा, 'यह दिल्ली पुलिस का अपना निर्णय नहीं है। यह पीएम मोदी और अमित शाह का निर्णय है, जो चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए विपक्ष की आवाज को दबाना चाहते हैं।'
विपक्ष की आगामी रणनीति
विपक्षी दलों के अनुसार, 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांकेतिक 'जन-महाभियोग' सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें 'वोट चोरी' और SIR प्रक्रिया की गड़बड़ियों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाएगा।
इसके बाद 1 नवंबर को 'दिल्ली चलो' मार्च के तहत 10 लाख लोगों को रामलीला मैदान में एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिन बीजेपी भी देशभर के जिला मुख्यालयों और दिल्ली में अपनी काउंटर-पदयात्राएं आयोजित करेगी, जिससे राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।





