पीएम नरेंद्र मोदी का बयान
पीएम नरेंद्र मोदी का बयान है कि मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि यह समय भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ है। संसद के इस निर्णय से लोकतंत्र को अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व है। मोदी ने यह भी जोड़ा कि जब महिलाएं प्रशासन और निर्णय प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो शासन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
पर्व और प्रेरक अवसर
प्रधानमंत्री ने बताया कि यह संसद का विशेष सत्र ऐसे समय पर आ रहा है जब देशभर में कई उत्सव मनाए जा रहे हैं, और यह महिला सशक्तिकरण अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में महा बिशुबा पणा, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु और पंजाब-उत्तर भारत में बैसाखी का पर्व मनाया जा रहा है। मोदी ने सभी को शुभकामनाएं दी और कहा कि ये अवसर जीवन में सुख-समृद्धि और नई आशा लेकर आएं।
इसी बीच, महात्मा फुले की 200वीं जयंती और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती भी याद दिलाती हैं कि सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाना जरूरी है।
महिला सशक्तिकरण में प्रगति
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, साइंस, टेक्नोलॉजी, खेल, उद्यमिता, कला और सशस्त्र बलों में। बीते 11 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन में सुधार के प्रयास किए गए हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उनकी वास्तविक भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है।
विधायी प्रक्रिया का महत्व
मोदी ने बताया कि पिछले दशकों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रयास लगातार होते रहे, लेकिन सफल नहीं हुए। सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। अब 2029 के लोकसभा और आने वाले विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण के प्रावधान लागू करना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक दल या सरकार का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का है। इस निर्णय से लोकतंत्र अधिक संवेदनशील, संतुलित और उत्तरदायी बनेगा।
सांसदों से समर्थन की अपील
प्रधानमंत्री ने सभी दलों के सांसदों से महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने का आग्रह किया और कहा कि यह कदम न केवल दशकों पुराना संकल्प पूरा करेगा बल्कि विकास की गति और लोकतंत्र की मजबूती में भी योगदान देगा।
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