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पीयूष गोयल ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठाए सवालों का जवाब दिया

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जीडीपी के आंकड़ों पर उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार लोग खुद को इकोनॉमिस्ट बताकर देश को भ्रमित कर रहे हैं।

पीयूष गोयल ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठाए सवालों का जवाब दिया
फोटो: पीयूष गोयल ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठाए सवालों का जवाब दिया

जीडीपी आंकड़ों पर राजनीतिक विवाद

अप्रैल से जून तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने भी इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले केवल शेष बेरोजगार लोग हैं।


गोयल ने कहा कि कुछ बेरोजगार लोग खुद को इकोनॉमिस्ट बताकर और देश को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से टीवी चैनलों पर आते हैं। उन्होंने नागरिकों को इस झांसे में न आने की सलाह दी।


पीयूष गोयल का बयान

जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों पर विपक्ष के नेताओं की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयूष गोयल ने कहा, "सच छिप नहीं सकता। मंत्री ये डेटा नहीं बनाते। जब आपकी सोच इतनी नकारात्मक होती है, तो आप अपने आप को कम आंक रहे होते हैं। जब आप सच को तोड़-मरोड़कर लोगों को निराश करने की कोशिश करते हैं, तो आप उन्हें धोखा दे रहे होते हैं।"


उन्होंने आगे कहा कि 7.8 प्रतिशत की रिकॉर्ड ग्रोथ भारत के 140 करोड़ लोगों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है, जो देश को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में स्थापित करती है।


सरकार का जीडीपी अनुमान विधि का बचाव

सांख्यिकी मंत्रालय ने हाल ही में जारी किए गए आर्थिक वृद्धि के अनुमानों की विधि का समर्थन किया और बताया कि पिछले साल के जीडीपी में संशोधन और विभिन्न मूल्य सूचकांकों में अंतर नवीनतम आंकड़ों और बेहतर अनुमान विधियों को दर्शाते हैं। यह स्पष्टीकरण तब आया जब सरकार ने 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर नई जीडीपी अनुमानों की एक श्रृंखला जारी की।


मंत्रालय ने कहा कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।


कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि मोदी सरकार को यह समझना होगा कि 'पीआर' से जीडीपी की छवि को चमकाया जा सकता है, लेकिन वास्तविक अर्थव्यवस्था को नहीं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी से बढ़ी जीडीपी को बढ़ावा दे रही है, जबकि यह वास्तविकता के विपरीत है।


रमेश ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के आकलन का हवाला देते हुए दावा किया कि देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 2.6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था वास्तव में मजबूत हो, लेकिन मजबूत अर्थव्यवस्था का रास्ता झूठे आंकड़ों को सजाने से नहीं, बल्कि सच्चाई को स्वीकार करने से निकलता है।"