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थलपति विजय को बहुमत न मिलने पर पलानीस्वामी ने की सरकार बनाने की कोशिश: खुलासा

दिनाकरन ने बताया कि पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री बनने की योजना बनाई थी।

थलपति विजय को बहुमत न मिलने पर पलानीस्वामी ने की सरकार बनाने की कोशिश: खुलासा
फोटो: Palaniswami's Attempt to Form Government After Vijay Lacks Majority: Revelation

चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति

तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय ने हाल ही में सत्ता में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। मई में चुनाव परिणामों के बाद कुछ राजनीतिक उठापटक के बाद विजय को बहुमत प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। लेकिन अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है।


राज्य की क्षेत्रीय पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) के नेता दिनाकरन ने खुलासा किया है कि जब विजय को बहुमत नहीं मिल रहा था, तब AIADMK के नेता एडप्पाड़ी के. पलानीस्वामी ने सत्ता हासिल करने का प्रयास प्रारंभ किया। इसमें VCK अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री बनाने की योजना थी।


पलानीस्वामी की रणनीति

दिनाकरन ने बताया कि पलानीस्वामी और अन्य नेताओं का उद्देश्य विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकना नहीं था, बल्कि यह योजना उस स्थिति को संभालने के लिए थी, जब विजय को बहुमत नहीं मिलता। उन्होंने कहा, "यह प्रयास तब किया गया था, जब तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) चुनाव नतीजों में बहुमत हासिल करने में असफल रहा था। उस समय कांग्रेस और अन्य दल डीएमके के साथ मौजूदा थे, जिससे विजय को बहुमत प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी।"


दिनाकरन ने इस बात पर जोर दिया कि एआईडीएमके की यह रणनीति तब शुरू हुई जब डीएमके ने पहले ही सरकार बनाने से इनकार कर दिया था। पलानीस्वामी का मानना था कि यदि विजय के विधायक पार्टी छोड़ते हैं, तो वे एआईडीएमके या उसके सहयोगियों में शामिल होंगे।


वामपंथी दलों का समर्थन न मिलना

दिनाकरन ने जानकारी दी कि इस संभावित गठबंधन पर विचार किया गया था, लेकिन वामपंथी पार्टियों ने एआईडीएमके को समर्थन देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि पलानीस्वामी को समर्थन देने का अर्थ भाजपा को समर्थन देना होगा।


हालांकि, इस समय थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन विजय को अंततः समर्थन मिल गया और यह प्रयास ठंडे बस्ते में चला गया।


विजय की पार्टी की स्थिति

यह उल्लेखनीय है कि थलपति विजय की पार्टी विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन उन्हें फिर भी समर्थन की आवश्यकता पड़ी। कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने की घोषणा की, लेकिन अन्य छोटे दलों ने डीएमके के साथ अपने पुराने संबंधों को तोड़ने में संकोच किया।


इस राजनीतिक उठापटक के बीच, वीसीके के थिरुमावलवन ने भी विजय सरकार को समर्थन देने की बात की थी, लेकिन उन्होंने कहा था कि उन्हें सीएम बनने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।