परिसीमन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने विधेयक के खिलाफ प्रक्रिया संबंधी नोटिस प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक संविधान पर हमला है और इसके लागू होने से दक्षिणी राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए विपक्ष ने परिसीमन विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, सीटों में वृद्धि उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच असंतुलन पैदा कर सकती है। उन्होंने राज्यों से व्यापक परामर्श की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
महिला आरक्षण का उद्देश्य
विधेयक के माध्यम से नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। इसका लक्ष्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना है, जबकि विपक्ष ने संविधान पर हमले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद का नोटिस भी पेश किया। एनडीए नेताओं ने कहा कि महिलाओं को इस आरक्षण के लिए वर्षों से इंतजार करना पड़ा है और यह विधेयक उनके अधिकारों को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
बीजेपी का समर्थन
बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन को संसद में व्यापक समर्थन मिलेगा। उन्होंने विपक्ष की चिंताओं को निराधार बताया और कहा कि किसी राज्य, विशेषकर दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक पारित होने पर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में क्रमिक रूप से किया जाएगा।
सीटों की संख्या में संभावित वृद्धि
मसौदा संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। इसी तरह, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यप्रणाली संघीय और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर सकती है। वहीं एनडीए नेताओं का कहना है कि यह विधेयक महिलाओं के लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकारों को सुनिश्चित करने का अवसर है और इसे जल्द ही पारित किया जाएगा।





