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“ऑपरेशन ब्लू स्टार एक भूल”: चिदंबरम बयान से सियासी तूफान, भाजपा ने कांग्रेस पर बरसाया हमला

उन्होंने सार्वजनिक मंच पर कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलत तरीका था और इसमें अनेक विभागों का साझा निर्णय था। इस टिप्पणी के बाद भाजपा और अन्य दलों ने...|

“ऑपरेशन ब्लू स्टार एक भूल”: चिदंबरम बयान से सियासी तूफान, भाजपा ने कांग्रेस पर बरसाया हमला
फोटो: Operation Blue Star
पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता P. चिदंबरम द्वारा दिए गए एक विवादित बयान ने भारतीय राजनीति में नई आग लगा दी है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलत तरीका था और इसमें अनेक विभागों का साझा निर्णय था। इस टिप्पणी के बाद भाजपा और अन्य दलों ने कांग्रेस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। इस लेख में हम पहले बताएँगे कि चिदंबरम ने क्या कहा, फिर राजनीतिक विवाद का स्वरूप जानेंगे, और अन्त में आने वाली चुनौतियों एवं संभावनाओं पर निगाह डालेंगे।

चिदंबरम का बयान और उसकी विवेचना


कसौली (हिमाचल प्रदेश) में आयोजित एक साहित्य समारोह में P. चिदंबरम ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को “गलत तरीका” बताया और कहा कि उसमें केवल इंदिरा गांधी को ही दोष नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और अन्य सरकारी तंत्रों का मिलाजुला निर्णय था।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने इस ‘गलती’ की कीमत अपनी जान से चुकाई। साथ ही उन्होंने यह तर्क दिया कि बाद के वर्षों में सरकारों ने ऐसे तरीके अपनाए जो संघर्ष को कम नुकसान पहुंचाते थे। उनका यह बयान कांग्रेस नेतृत्व में एक अनपेक्षित मोड़ था, क्योंकि लंबे समय से यह विषय पार्टी के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है।

राजनीतिक बवाल: भाजपा, SGPC और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएँ


  • भाजपा का हमलावर रुख

    चिदंबरम के बयान को सुनते ही भाजपा ने इसे अवसर मानते हुए कांग्रेस पर आक्रमण किया। भाजपा प्रवक्ता R.P. Singh ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार पूरी तरह से टाला जा सकने योग्य था और इसे एक राजनीतिक साहसिक कदम माना जाना चाहिए, न कि राष्ट्रीय आवश्यकता।

    उन्होंने यह तर्क दिया कि ऑपरेशन “Black Thunder” जैसे अन्य रणनीति उपयोग में लाई जा सकती थीं, जिनमें धार्मिक स्थानों को क्षति पहुँचाए बिना समस्या सुलझाई जा सकती थी। भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस अब अपनी पुरानी गलतियों से भाग नहीं सकती।

  • SGPC और सिख नेताओं की प्रतिक्रिया

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने चिदंबरम के बयान को मिले-जुले स्वर से लिया। उन्होंने कहा कि जबकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि ऑपरेशन गलत था, पर उन्होंने चिदंबरम पर आरोप लगाया कि उन्होंने यह झूठ कहा कि यह साझा निर्णय था — SGPC का तर्क है कि यह निर्णय इंदिरा गांधी का व्यक्तिगत निर्णय था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए और जनता के प्रति जिम्मेदारी लेनी चाहिए। 

  • कांग्रेस नेतृत्व का दबाव और प्रतिक्रिया

    चिदंबरम की टिप्पणी पर कांग्रेस के भीतर भी तनाव उत्पन्न हो गया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि चिदंबरम ने BJP की लाइन पर काम किया है और कांग्रेस की लाइन से विचलन किया है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल उठाया कि 50 वर्ष बाद चिदंबरम को यह टिप्पणी क्यों करनी पड़ी, और क्या वह किसी दबाव में थे। पार्टी सूत्रों ने यह भी कहा कि गलत वक्तव्य से कांग्रेस की छवि को नुकसान हो सकता है।

चुनौतियाँ और राजनीतिक निहितार्थ


  • संवेदनशील इतिहास और राजनीतिक जोखिम

    ऑपरेशन ब्लू स्टार 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में की गई सैन्य कार्रवाई थी, जिसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या और सिख विरोधी दंगे हुए। इस कारण यह विषय आज भी बेहद संवेदनशील है। चिदंबरम की टिप्पणी ने कांग्रेस को उस पुराने घाव को फिर से सार्वजनिक डिबेट में ला दिया है।

  • कांग्रेस का दुविधा में फँसना

    चिदंबरम द्वारा बयान देने से कांग्रेस को मजबूरी सी झेलनी पड़ सकती है — एक ओर पार्टी की विरोधी ताकतों द्वारा इस बयान को निशाना बनाया जाना, दूसरी ओर पार्टी की जनाधार छवि को सँभालना। यदि पार्टी कड़ा रुख अपनाती है, तो यह कट्टर समर्थकों को नाराज कर सकती है; यदि नरम रुख लेती है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जा सकता है।

  • राजनीतिक लाभ और नुकसान

    भाजपा को यह मौका मिला है कि वह कांग्रेस की पुरानी नीतियों को फिर से सवालों के घेरे में लाए। यह बयान भाजपा की रणनीति को मजबूती दे सकता है कि कांग्रेस में सोच बदल रही है। हालांकि, यदि कांग्रेस समर्थक वर्ग इससे नाराज हो जाए, तो वह उल्टा प्रभाव भी डाल सकता है।

  • भविष्य के राजनीतिक परिदृश्यों की राह

    कांग्रेस उम्मीदवारों और नेताओं को संभावित तौर पर इस बयान से दूरी बनानी होगी या बेहतर ढंग से सफाई देनी होगी। अन्य दल, खासकर पंजाब और सिख राजनीति में सक्रिय पार्टियाँ, इस बयान का अपने तरीके से उपयोग करेंगी। चुनावी माहौल में यह बयान संवेदनशील मुद्दों की पुनरुत्थान की भूमिका निभा सकता है।