गृह मंत्री से एनसीपी नेताओं की मुलाकात
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के छह नेताओं ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मीटिंग में सुनेत्रा पवार और उनके पुत्र पार्थ पवार उपस्थित नहीं थे। एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुशरिफ और धनंजय मुंडे ने इस बैठक में भाग लिया। इसके बाद पार्टी में अंदरूनी मतभेदों को लेकर चर्चा शुरू हो गई, लेकिन एनसीपी ने इन अटकलों को नकार दिया।
एक सीनियर नेता ने बताया कि यह बैठक एनसीपी और महायुति गठबंधन के अन्य दलों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने के लिए आयोजित की गई थी। उन्होंने सुनेत्रा पवार और उनके बेटों की अनुपस्थिति को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं को दरकिनार करते हुए कहा, 'हम सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में सामूहिक रूप से काम करेंगे। एनसीपी और शरद पवार के बीच विलय की संभावनाओं को खारिज किया गया है।'
वित्त मंत्रालय की मांग
बैठक के बाद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने संवाददाताओं से कहा कि एनसीपी वित्त मंत्रालय का विभाग वापस पाने की इच्छुक है और यह तय करेगी कि मंत्रालय का नेतृत्व कौन करेगा। तटकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में वित्त मंत्रालय के आवंटन का मुद्दा उठाया गया था।
उन्होंने कहा कि पार्टी में असंतोष की कोई बात नहीं है और सभी नेता संवाद और सामूहिक नेतृत्व के माध्यम से काम कर रहे हैं।
पार्टी प्रवक्ता का बयान
एनसीपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि यह खबर गलत और भ्रामक है कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को बैठक के दौरान दरकिनार किया गया। पाटिल ने बताया कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने पहले भी शाह से मुलाकात की थी और पार्टी के सामने उपस्थित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी।
उन्होंने कहा, 'इन वरिष्ठ नेताओं को पार्टी के महत्वपूर्ण मुद्दों और राज्य के हितों से संबंधित मामलों की अच्छी जानकारी है। सोमवार की बैठक इसी संदर्भ में हुई थी।' पाटिल ने यह भी कहा कि एनसीपी महायुति गठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में सभी नेता एकजुट हैं।
मीडिया पर टिप्पणी
पाटिल ने मीडिया को सलाह दी कि वह एनसीपी के बारे में किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच कर लें। उन्होंने कहा, 'गठबंधन सहयोगियों के नेताओं के बीच होने वाली औपचारिक मुलाकातों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। अटकलों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।'





