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सांसद सैयद आगा रुहुल्लाह का नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा, अब्दुल्ला परिवार पर तीखा हमला

सैयद आगा रुहुल्लाह ने पार्टी पर चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया।

सांसद सैयद आगा रुहुल्लाह का नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा, अब्दुल्ला परिवार पर तीखा हमला
फोटो: MP Syed Aga Ruhullah Resigns from National Conference, Criticizes Abdullah Family

सांसद का इस्तीफा

जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद सैयद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने मंगलवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस से अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद किए गए वादों से वह पीछे हट गई है। रुहुल्लाह ने लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ने का निर्णय लिया और अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा। यह घोषणा उन्होंने बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित रैली में की।


अपने 80 मिनट के संबोधन में, उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह अब ऐसे संगठन का हिस्सा नहीं रह सकते, जिसने अपने वादों को पूरा नहीं किया।


चुनावी वादों का उल्लंघन

सैयद आगा रुहुल्लाह ने कहा कि चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और मुफ्त बिजली देने जैसे वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी इन वादों को भूल गई। उन्होंने अपने इस्तीफे के दो पन्नों में लिखा कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों के राजनीतिक अधिकारों और सम्मान को वापस पाने का यह एक अवसर था।


उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इस लड़ाई की अगुवाई करेगी, लेकिन चुनाव के बाद पार्टी का रुख बदल गया, जिसे उन्होंने लोगों के साथ विश्वासघात बताया।


उमर अब्दुल्ला पर हमला

रुहुल्लाह ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की भी आलोचना की। उन्होंने उन्हें एक अक्षम नेता बताते हुए कहा कि उमर ने चुनाव से पहले बड़े वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद विधानसभा में कहा कि उन्हें चुनावी घोषणापत्र बनाने का अफसोस है।


उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग नेशनल कॉन्फ्रेंस की सत्ता में आने के नाम पर उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए आए थे, उनके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। इसके बजाय, सरकार ने छात्रों के आरक्षण और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया।


नए राजनीतिक संगठन के संकेत

रुहुल्लाह ने कहा कि चुनाव से पहले पार्टी ने लोगों का समर्थन मांगा, लेकिन सत्ता मिलने के बाद उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। इस्तीफे का पत्र उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को सीधे देने के बजाय मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा, जो 2010 में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए किशोर तुफैल मट्टू के पिता हैं।


रैली में उन्होंने नए राजनीतिक संगठन के गठन के संकेत भी दिए, लेकिन कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता किसी पार्टी का गठन नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सम्मान की बहाली के लिए आंदोलन करना है।