स्मारक पर जल्द आएगा फैसला
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार आगामी दिनों में इस विषय पर निर्णय ले सकती है। 26 दिसंबर को मनमोहन सिंह का निधन हुआ था, और 28 दिसंबर को उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया। रविवार को उनकी अस्थियां यमुना नदी के तट पर विसर्जित कर दी गईं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए उपयुक्त स्थान आवंटित करने का निर्णय लिया है और इस बारे में उनके परिवार को भी जानकारी दी गई है।
2000 का स्मारक नीति फैसला
पूर्व प्रधानमंत्रियों और अन्य नेताओं के स्मारकों को लेकर 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि पूर्व राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के निधन के बाद कोई नया स्मारक नहीं बनाया जाएगा। दिल्ली में वर्तमान में राजघाट परिसर और उसके आसपास 18 स्मारक स्थित हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों और उप प्रधानमंत्रियों के स्मारक शामिल हैं। इनमें राजघाट, शांति वन, शक्ति स्थल, वीर भूमि, एकता स्थल, समता स्थल और किसान घाट प्रमुख हैं। ये स्मारक 245 एकड़ भूमि पर फैले हुए हैं।
2015 में निर्मित राष्ट्रीय स्मृति स्थल, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की समाधि का स्थान बना। हालांकि, उनके परिवार को इसके लिए 10 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। राजघाट परिसर में दो अपवाद भी हैं—संजय गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री के स्मारक।
सरकार का यह निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की स्मृति को सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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