राहुल गांधी का नेतृत्व और वकीलों की भागीदारी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन का 'चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च' आज दोपहर को आरंभ हुआ। यह मार्च कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन से निकल कर सुप्रीम कोर्ट की दिशा में बढ़ा, जिसमें सैकड़ों वकील शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों समेत लगभग 1000 वकील एकत्रित हुए।
इस मार्च में भाग लेने वाले वकीलों का कहना है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।
मार्च का उद्देश्य और न्यायालय के रुख
यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, चुनावी रोल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर रोक और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया। राहुल गांधी ने पहले ही कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपेंगे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पहले मुलाकात से इनकार करते हुए याचिका दायर करने की सलाह दी थी, जिसके बाद विपक्ष ने यह मार्च निकाला।
मार्च में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और अन्य वकील संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। इससे पहले 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान कुछ वकीलों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित कार्रवाई की शिकायतें सुप्रीम कोर्ट में दर्ज की गई थीं। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि हर वकील को निर्धारित स्थलों पर शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है।
मार्च का मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था
मार्च का मार्ग कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड से शुरू होकर तिलक मार्ग होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य इंडिया गठबंधन के नेता भी शामिल रहे। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। सुरक्षा कारणों से कुछ मेट्रो स्टेशन भी बंद किए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाना चाहते हैं।
हाल के दिनों में दिल्ली में इस मुद्दे पर निरंतर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च के दौरान राहुल गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद भी विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा। आज का मार्च इस श्रृंखला में वकीलों की बड़ी भागीदारी के साथ आयोजित किया गया है।
विपक्ष का दावा और सरकार की प्रतिक्रिया
विपक्ष का यह दावा है कि यह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई है, जबकि सरकार और चुनाव आयोग इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं।
इस प्रकार, यह मार्च न केवल वकीलों के अधिकारों की रक्षा के लिए, बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।





