कोलकाता बाढ़ का भयावह चश्मा – रिकॉर्ड बारिश और पानी में डूबते इलाके
रात के अंधेरे में चली इस बारिश ने कोलकाता में लगभग 252 मिमी बारिश दर्ज करवाई, और वह भी केवल 7 घंटे में।
यह बारिश इतनी असाधारण थी कि इससे शहर के निम्न इलाकों, सड़कों और आवासीय इलाकों में जलभराव हो गया।
कई इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुँच गया, वाहन बह गए, और बाजार‑पड्के, पूजा पंडालों की तैयारी भी प्रभावित हुई।
इस भारी बारिश का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी में बने निम्न‑दाब (low‑pressure) क्षेत्र को माना जा रहा है, जिसने बादल गठन को बढ़ावा दिया और तीव्र वर्षा कराई।
कोलकाता बाढ़ में बिजली हादसे – क्या चूक हुई?
“कोलकाता बाढ़” की इस घटना में कम‑से‑कम आठ लोगों की मौत बिजली करंट लगने से हुई।
अधिकांश मृतकों ने गीली सड़कों, पानी भरे इलाकों या सड़क‑बत्ती पोल, लैंप पोस्ट या बिजली तारों से संपर्क में आकर करंट झेला।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बिजली वितरण कंपनी CESC और नगरपालिका की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने मृतक परिवारों को मुआवज़ा और नियुक्ति देने की बात कही है।
साथ ही, कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुरक्षा कारणों से बंद करने का आदेश दिया गया ताकि और हादसे न हों।
प्रभाव और तैयारियाँ: “कोलकाता बाढ़” ने कैसे बदला रोज़मर्रा का चेहरा
“कोलकाता बाढ़” की इस अचानक आई मौसमी प्रकृति ने कई सिस्टम और व्यवस्थाओं की परीक्षा ली:
- यातायात एवं परिवहन: सड़कों पर पानी इतना खड़ा हो गया कि ट्रैफिक थम गया। कई जगहों पर बसें फंस गईं, मेट्रो और ट्रेन सेवाएँ बाधित हुईं।
- शिक्षा एवं संस्थान: स्कूल‑कॉलेजों को इस आपदा के कारण बंद कर देना पड़ा। दुर्गा पूजा की तैयारियाँ ठप होने लगीं क्योंकि पंडालों के तैयार करने की जगहें पानी में डूब गई थीं।
- विमान और रेल संचालन: कोलकाता हवाई अड्डे की रनवे भी पानी से प्रभावित हुई, कई उड़ानें रद्द या स्थगित की गईं। रेल और मेट्रो ट्रैक नीचे पानी से जलमग्न हो गए।
- प्रशासन और चेतावनियाँ: मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
नगर निगम, बिजली विभाग और राज्य सरकार ने मिलकर राहत उपायों की योजना बनाई है। बारिश के मुकाबले जल निकासी प्रणालियों की क्षमता, पुलिस, आम नागरिकों की सतर्कता आदि पर बल दिया गया है।





