केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के लोक भवन की रसोई में नॉनवेज भोजन नहीं बनाने के निर्देश को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। कांग्रेस और सीपीएम ने सवाल उठाया कि राज्यपाल की निजी पसंद अलग है, लेकिन क्या दूसरों की खानपान संबंधी पसंद भी इसी से तय होगी? 24 अक्टूबर को लोक भवन ने स्पष्ट किया कि निर्देश केवल उस रसोई के लिए है, जहां राज्यपाल, उनके परिवार, रिश्तेदारों और निजी मेहमानों का भोजन बनता है।
हिंदू परंपराओं में मांसाहार का इतिहास
मांसाहार को हिंदू संस्कृति के खिलाफ बताने वाली धारणाओं के बीच रिपोर्ट में धर्मशास्त्रों और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया गया। मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के कुछ श्लोकों में निर्धारित परिस्थितियों में मांस खाने और धार्मिक अनुष्ठानों में इसके इस्तेमाल का जिक्र है। विद्वान पीवी काणे की पुस्तक धर्मशास्त्र का इतिहास में भी श्राद्ध से जुड़ी प्राचीन परंपराओं का उल्लेख मिलता है। स्वामी विवेकानंद के एक भाषण में भी प्राचीन भारत में ब्राह्मणों के गौमांस सेवन का संदर्भ दिया गया है।
भारत में धार्मिक परंपराएं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रही हैं। असम के कामाख्या मंदिर, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, कोलकाता के कालीघाट और झारखंड के रजरप्पा मंदिर में पशुबलि की परंपराओं का उल्लेख मिलता है। रिपोर्ट में 20 अक्टूबर 2026 को अगरतला के दुर्गाबाड़ी मंदिर में महानवमी पर पशुबलि की खबर का भी जिक्र है।
खानपान और राजनीति का संबंध
खाने की पसंद को लेकर राजनीतिक विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। मेघालय में भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बीफ खाने और राज्य में इसकी अनुमति की बात कही, जबकि उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों और बिना लाइसेंस वाली दुकानों पर कार्रवाई हुई। गुजरात में सार्वजनिक स्थानों पर नॉनवेज ठेले हटाने और दिल्ली में नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानें बंद रखने की मांग जैसे मामले भी बहस का हिस्सा बने। अहमदाबाद में खानपान की पसंद पर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में सवाल उठे।
ओपी माथुर का भाजपा और मोदी से जुड़ाव
ओपी माथुर लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में संगठनात्मक पदों पर रहे। वे राजस्थान भाजपा के संगठन महामंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष रहे तथा दो बार राज्यसभा पहुंचे। गुजरात में पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के दौरान 2007 के विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के अभियान से भी जुड़े रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें गुजरात की जिम्मेदारी दी गई थी। 2022 में वे भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल हुए और 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में संगठनात्मक भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति ने जुलाई 2024 में माथुर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया। अक्टूबर 2026 में उन्हें केरल स्थानांतरित किया गया। इस पूरे विवाद ने निजी खानपान की पसंद, धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक पदों की भूमिका पर फिर चर्चा छेड़ दी है।





