कर्नाटक में सीएम का बदलाव
स्वामीजी ने स्पष्ट कहा कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री का बदलाव न किया गया और डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो कांग्रेस को राज्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वामीजियों की महासभा पहले शिवकुमार से मुलाकात करेगी और इसके बाद लगभग 25 स्वामी दिल्ली जाकर अपनी मांग पार्टी आलाकमान के सामने रखेंगे।
शिवकुमार का योगदान
प्रणवानंद स्वामीजी ने कहा कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के हकदार हैं, और कांग्रेस नेतृत्व की मांग है कि उन्हें यह पद तुरंत दिया जाए, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कठिन समय में पार्टी को नेतृत्व दिया और सत्ता में वापसी सुनिश्चित की। इसके बावजूद, अब उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं दिया जा रहा, जो कि उनके लिए अपमानजनक स्थिति है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के सामने किए गए वादों को याद दिलाया और कहा कि पार्टी को इसे पूरा करना चाहिए।
सिद्धारमैया की भूमिका
स्वामीजी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया पिछड़े समुदायों के बड़े नेता हैं, लेकिन उनके पहले कार्यकाल में पिछड़े वर्ग को कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उन्होंने हाल के राज्य बजट का भी हवाला देते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए।
4 मई चुनाव परिणाम
राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि 4 मई को पांच राज्यों और दो कर्नाटक विधानसभा सीटों पर उपचुनावों के नतीजों के बाद नेतृत्व में फेरबदल और कैबिनेट बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं। स्वामीजी का कहना है कि शिवकुमार के अनुभव और पिछड़े वर्ग के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाना आवश्यक है।
कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले साल नवंबर में पार्टी ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा किया, और तब से ही नेतृत्व परिवर्तन की मांग लगातार उठ रही है। प्रणवानंद स्वामीजी की अपील के बाद यह मुद्दा और अधिक तीव्र हो गया है।
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