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स्पेन में कनिमोझी का जवाब- "भारत की राष्ट्रीय भाषा है एकता और विविधता"

भारत के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि को स्पेन में प्रवासी भारतीयों ने उस वक्त खूब सराहा, जब उन्होंने भारत |

स्पेन में कनिमोझी का जवाब- "भारत की राष्ट्रीय भाषा है एकता और विविधता"
फोटो: स्पेन में कनिमोझी का जवाब- "भारत की राष्ट्रीय भाषा है एकता और विविधता"
भारत के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि को स्पेन में प्रवासी भारतीयों ने उस वक्त खूब सराहा, जब उन्होंने भारत की ‘राष्ट्रीय भाषा’ को लेकर एक सशक्त और समावेशी संदेश दिया। प्रवासी समुदाय के साथ बातचीत के दौरान जब यह पूछा गया कि भारत की राष्ट्रीय भाषा क्या है, तो कनिमोझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "भारत की राष्ट्रीय भाषा उसकी एकता और विविधता है। यही संदेश हम दुनिया के सामने लेकर आए हैं, और यही आज सबसे ज़रूरी बात है।" कनिमोझी की यह टिप्पणी उस समय आई है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत त्रिभाषा फॉर्मूले को लेकर तमिलनाडु सरकार और केंद्र के बीच लगातार टकराव बना हुआ है। 

इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं, राजीव राय (समाजवादी पार्टी), बृजेश चौटा (भाजपा), प्रेम चंद गुप्ता (राजद), अशोक कुमार मित्तल (आप), साथ ही पूर्व राजनयिक मंजीव एस पुरी और जावेद अशरफ। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य था पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद को वैश्विक मंच पर बेनकाब करना और 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया को अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाना। मैड्रिड में प्रतिनिधिमंडल की स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अलबरेस से मुलाकात हुई, जहां उन्होंने आतंकवाद के प्रति भारत की "शून्य सहनशीलता" की नीति को दोहराया।

स्पेन ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों के प्रति "स्पष्ट समर्थन" जताया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मैड्रिड में स्थित ‘एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ टेररिज्म’ के साथ बैठक भी की। यह संगठन दुनियाभर में आतंकवाद के पीड़ितों के लिए काम करता है और अब तक 4,000 से अधिक पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक सहायता दे चुका है। 

बैठक का उद्देश्य था कि आतंकवाद से प्रभावित लोगों को सहायता देने में भारत और स्पेन के अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान। यह दौरा पांच देशों की उस कूटनीतिक यात्रा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत ने सीमापार आतंकवाद के खिलाफ अपना मजबूत पक्ष रखा है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की दिशा में अहम पहल की है।