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जगन रेड्डी का राजनीतिक झुकाव: भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन

जगन मोहन रेड्डी ने भाजपा से दूर होकर कांग्रेस के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं।

जगन रेड्डी का राजनीतिक झुकाव: भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन
फोटो: Jagan Reddy's Political Shift: Possible Alliance with Congress Against BJP

जगन का भाजपा से मोहभंग

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाई.एस.आर. कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' अलायंस के प्रति झुकाव के संकेत दिए हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह इस गठबंधन में शामिल होंगे या नहीं, लेकिन यह तय है कि वह अब केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और मोदी सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।


जगन मोहन ने कई बार संसद में मोदी सरकार के कई बिलों को पारित कराने में मदद की है, लेकिन अब उनके मन में अपनी पूर्व की गलतियों का पछतावा है। उन्होंने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के चयन के लिए 2023 में लाए गए NDA सरकार के कानून का समर्थन करने पर खेद जताया है।


राजनीतिक समीकरण में बदलाव

जगन मोहन रेड्डी ने मौजूदा चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए कहा, "हमें उस प्रक्रिया का समर्थन करने पर पछतावा है, जिसके तहत सत्ताधारी पार्टी केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त को नामित करती है। CEC और राज्य चुनाव आयुक्त (SEC) की नियुक्ति सत्ताधारी पार्टी द्वारा नहीं की जानी चाहिए।" उन्होंने सुझाव दिया कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होने चाहिए और इन तीनों को अपने वोटिंग अधिकारों का उपयोग करना चाहिए।


इस बयान के बाद जगन के भविष्य के राजनीतिक कदमों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। यह महत्वपूर्ण है कि क्या वह एकला चलो की राजनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो क्या कांग्रेस आंध्र प्रदेश में उनके साथ गठबंधन करने को तैयार होगी? क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करना कांग्रेस के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।


भाजपा का विश्वासघात

जगन रेड्डी ने 2019 से 2024 के बीच भाजपा के कई महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने उनकी निष्ठा को नजरअंदाज करते हुए चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के साथ सहयोग किया। इस सहयोग ने आंध्र प्रदेश विधानसभा की 175 में से 164 सीटों और लोकसभा की 25 में से 21 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जगन की पार्टी YSRCP केवल 11 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर सीमित रह गई।


अब, जगन रेड्डी 2029 के चुनावों के लिए नया राजनीतिक रास्ता तैयार करने में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जगन का मुख्य वोट बैंक वही पारंपरिक कांग्रेस समर्थक हैं, जिन्होंने उनके पिता वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद कांग्रेस से दूरी बना ली थी।


2029 के चुनाव की रणनीति

2029 का चुनाव जगन और कांग्रेस दोनों के लिए एक 'करो या मरो' की स्थिति बन चुकी है। ऐसे में यदि जगन और कांग्रेस मिलकर भाजपा के खिलाफ एकजुट होते हैं, तो यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव साबित हो सकता है।


अगर जगनमोहन ने पुराने मतभेद भुलाकर कांग्रेस से सहयोग किया, तो यह नरेंद्र मोदी सरकार के लिए संसद में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। वर्तमान में जगन के पास 15 सांसद हैं (लोकसभा में 4 और राज्यसभा में 11), जो केंद्र की NDA सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आवाज उठा सकते हैं। इस स्थिति में मोदी सरकार को अपने महत्वाकांक्षी बिलों के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।