पीएम मोदी ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल (एक्स) पर बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति के साथ मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, नागरिकों की हानि और ढांचागत नुकसान को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
ईरान-इजराइल संघर्ष पर भारत की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत में दो अहम संदेश दिए। पहला, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाधता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दूसरा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता ही समाधान है। ईरान-इजराइल संघर्ष पर भारत की प्रतिक्रिया भी इसी दिशा में रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार चर्चा हो चुकी है। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत में तेल-गैस संकट पर संभावित राहत
पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की इस बातचीत से भारत में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर संभावित संकट से राहत मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति से कहा कि भारतीय जहाजों और माल के सुरक्षित पारगमन को सुनिश्चित किया जाए। इस बातचीत में भारत और ईरान के बीच व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा परिवहन के निरंतर प्रवाह पर विशेष ध्यान दिया गया।
यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हाल ही में इराक में एक अमेरिकी जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। चीन पहले से ही ईरानी मार्गों का उपयोग कर रहा है, और अब भारत को भी इसी तरह की सुरक्षा रियायत मिलने की संभावना है। ईरान-इजराइल संघर्ष पर भारत की प्रतिक्रिया भी इसी संदर्भ में सामने आई है, जहां भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता देने की बात कही है।
स्ट्रेट ऑर्फ होर्मुज पर स्थिति
ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को दुनिया के सामने पहली बार संदेश जारी किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑर्फ होर्मुज को फिलहाल बंद रखने की घोषणा की और खाड़ी के पड़ोसी देशों पर हमले जारी रखने की चेतावनी दी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की बात कही।
इन परिस्थितियों के बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समुद्री शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई, और भारतीय जहाजों को सुरक्षित पारगमन की अनुमति मिलने की संभावना बनी हुई है।
इस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने जंग के बीच भारत की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और शांति की प्रतिबद्धता दोहराई, और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया।
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