रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम यमन में निमिषा प्रिया को दी गई सजा से अवगत हैं। हम समझते हैं कि उनका परिवार इस समय उचित कानूनी उपायों की खोज कर रहा है। हमारी सरकार इस मामले में उनके साथ है और हम हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।"
इससे पहले, सोमवार को यमन के राष्ट्रपति ने केरल की निवासी निमिषा प्रिया को मौत की सजा के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें अगले महीने के भीतर मृत्युदंड दिया जा सकता है।
निमिषा प्रिया का मामला 2017 से जुड़ा हुआ है, जब उन्हें यमन के नागरिक तलाल अब्दो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया था। निमिषा 2012 में यमन एक नर्स के तौर पर काम करने के लिए गई थीं, और वहां 2015 में तलाल के साथ मिलकर एक क्लीनिक खोला था। हालांकि, तलाल ने धोखे से क्लीनिक में अपना नाम शेयरहोल्डर के रूप में शामिल किया और आधी आय हड़पने की कोशिश की, साथ ही खुद को निमिषा के पति के तौर पर प्रस्तुत किया। जब निमिषा ने इस धोखाधड़ी के बारे में पूछताछ की, तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और तलाल ने उन्हें शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण का शिकार बना दिया।
इस उत्पीड़न से तंग आकर, निमिषा ने जुलाई 2017 में तलाल को नशीला इंजेक्शन दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। निमिषा का कहना है कि उनका इरादा तलाल को मारने का नहीं था, बल्कि वह सिर्फ अपना पासपोर्ट वापस लेना चाहती थीं, जो तलाल के पास था।
निमिषा की मां, प्रेमकुमार ने यमन जाकर अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन यमन की निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद यमन की सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिससे निमिषा के लिए हालात और भी कठिन हो गए हैं।
भारत सरकार के प्रयासों के बावजूद, यह मामला अभी भी गंभीर रूप से उलझा हुआ है, और यमन में निमिषा की स्थिति को लेकर आशंका जताई जा रही है कि अगर उनके मामले में तत्काल कोई कानूनी राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। भारत सरकार ने उनके परिवार को आश्वासन दिया है कि वे हर संभव कानूनी उपायों की तलाश में उनकी मदद करेंगे, और इस जटिल मामले में कोई भी संभव सहायता देने के लिए तैयार हैं।





