मुख्यमंत्री का कोर्ट में सामना
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय वर्तमान में मद्रास हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामले का सामना कर रहे हैं। यह मामला उनकी चुनावी जीत के खिलाफ दायर एक याचिका से संबंधित है, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में बच्चों का उपयोग किया। इस याचिका को लेकर सुनवाई जारी है, जिसमें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ने ये आरोप लगाए हैं।
गुरुवार को आयोजित सुनवाई में, विजय ने अदालत में स्पष्ट किया कि बच्चों के उपयोग का आरोप उनकी चुनावी जीत को रद्द करने का वैध आधार नहीं हो सकता। उन्होंने यह दलील तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा सीट से उनके खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए दी।
याचिका में उल्लंघन के आरोप
याचिका के अनुसार, विजय और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रचार में बच्चों का उपयोग किया। इसमें चुनाव आयोग द्वारा 5 फरवरी 2024 को जारी की गई उस गाइडलाइन का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें राजनीतिक दलों को चुनावी गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल से रोकने की बात कही गई है।
इरुदयराज का कहना है कि यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत जारी किया गया था और इसका उल्लंघन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100(1)(d)(iv) के तहत चुनाव रद्द करने का आधार बनता है।
मुख्यमंत्री का जवाब
विजय ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि भले ही बच्चों के इस्तेमाल का आरोप सही मान लिया जाए, फिर भी यह चुनाव रद्द करने के लिए कानूनी रूप से पर्याप्त आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका यह साबित करने में असफल रही है कि चुनाव आयोग का निर्देश किसी कानूनी आदेश का उल्लंघन था।
विजय ने यह तर्क भी प्रस्तुत किया कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन अपने आप में चुनाव रद्द करने का स्वतंत्र आधार नहीं हो सकता।
चुनावी जीत से संबंध का अभाव
मुख्यमंत्री ने अदालत में यह भी कहा कि याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चुनाव प्रचार में बच्चों की कथित भागीदारी के कारण कितने वोट उनके पक्ष में पड़े। उनका कहना था कि याचिकाकर्ता ने केवल यह दावा किया है कि मतदाता 'भावनात्मक रूप से प्रभावित' हुए और इस गतिविधि का मतदाताओं पर 'गहरा प्रभाव' पड़ा।
उन्होंने कहा कि आरोप और उनकी जीत के बीच कोई तथ्यात्मक संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
अन्य आरोपों का खंडन
विजय ने चुनाव खर्च और विदेशी फंडिंग से संबंधित आरोपों को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि याचिका में खर्च के मात्र अनुमानित आंकड़े दिए गए हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि पैसा किसने खर्च किया या कब भुगतान किया गया।
विदेशी फंडिंग के आरोप पर उन्होंने कहा कि याचिका में किसी भी योगदानकर्ता, रकम, प्राप्तकर्ता या पैसे के ट्रांसफर की जानकारी नहीं दी गई है।
धार्मिक स्थलों पर प्रचार के आरोप
चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक स्थलों के उपयोग के आरोप पर भी विजय ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिका में ऐसा कोई बयान नहीं है जिसमें यह उल्लेख किया गया हो कि उन्होंने धार्मिक आधार पर वोट मांगे हों।
विजय का कहना है कि किसी उम्मीदवार का धार्मिक स्थल पर जाना या वहां प्रार्थना करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(3) के तहत भ्रष्ट आचरण का आधार नहीं बन सकता। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होने की संभावना है।





