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राष्ट्रीय • तमिलनाडु

हाईकोर्ट ने थलपति विजय को 'लाश' कहने वाली DMK नेता को दी जमानत

DMK पार्षद ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

हाईकोर्ट ने थलपति विजय को 'लाश' कहने वाली DMK नेता को दी जमानत
फोटो: High Court Grants Bail to DMK Leader Who Called Thalapathy Vijay a 'Corpse'

DMK नेता की विवादास्पद टिप्पणी

तमिलनाडु में थलपति विजय के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली DMK महिला पार्षद डी सुधा को उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। पिछले महीने एक पार्टी बैठक के दौरान उन्होंने विजय की तुलना पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से करते हुए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिससे मामला अदालत पहुंचा।


कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक नेताओं को आलोचना, उपहास और यहां तक कि अपशब्दों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। इस संबंध में जस्टिस एन रमेश ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में भद्दी भाषा का प्रयोग भी अंतर्निहित है।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणियाँ

हाईकोर्ट ने अपने 16 पन्नों के आदेश में कहा कि सरकार कभी भी अपने विनम्र आलोचकों को गिरफ्तार करने का प्रयास नहीं करेगी। जस्टिस रमेश ने कहा, "अभिव्यक्ति की संवैधानिक सुरक्षा की परीक्षा तब होती है जब भाषण भद्दा हो, न कि जब विनम्र भाषा का उपयोग किया जाए।"


कोर्ट ने यह भी बताया कि राजनीतिक भाषणों के संदर्भ में पुलिस को गिरफ्तारी की धमकी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को आलोचना का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।


घटना का विस्तृत विवरण

यह मामला 7 अक्टूबर को ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के वार्ड 95 की पार्षद डी सुधा द्वारा की गई टिप्पणी से शुरू हुआ। उन्होंने एक बैठक में मुख्यमंत्री विजय को 'लाश' कहकर संबोधित किया था। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे विजय पर स्टालिन के लुक की आलोचना करने का आरोप लगा रही थीं।


डी सुधा ने कहा था, "तुम हमारे नेता के हैंडसम लुक्स में कमियां निकाल रहे हो... मेरे नेता 74 साल के हैं और तुम 52 के हो।" इस बयान के बाद TVK के एक पदाधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोर्ट ने पाया कि यह भाषण किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं था।


पुलिस की भूमिका और DMK नेता की माफी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह मामला मूल रूप से मानहानि का था, जिसका अलग कानूनी प्रावधान है। कोर्ट ने कहा, "पुलिस राज्य की सेवा करती है, न कि केवल सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टी की।"


इस मामले में डी सुधा ने अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है और मुख्यमंत्री से माफी मांगी है। कोर्ट ने उन्हें 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत प्रदान की है।