भारत में हीलियम संकट, उद्योग पर असर
भारत में हीलियम संकट के चलते हीलियम गैस का इस्तेमाल उच्च तकनीकी उद्योगों में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में होता है। सेमीकंडक्टर उद्योग में हीलियम का उपयोग वेफर को ठंडा करने में किया जाता है। वहीं, ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्टफोन निर्माण में भी इस गैस की अहम भूमिका है। सप्लाई में कमी के कारण उत्पादन धीमा हो सकता है, जिससे तकनीकी उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
MRI मशीनों की ठंडक व्यवस्था संकट में
स्वास्थ्य क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। पश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर प्रभाव स्पष्ट है, क्योंकि देश में लगभग 5,000 से 7,000 MRI मशीनें सक्रिय हैं, जिनमें से अधिकतर आयातित हैं। कई मशीनें भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित या नवीनीकृत की गई हैं। MRI मशीनों में सुपरकंडक्टिंग मैगनेट का संचालन हीलियम गैस के माध्यम से होता है। हीलियम की कमी से इन मशीनों का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे डायग्नोस्टिक सेवाओं में रुकावट आ सकती है।
सरकार की तैयारियां और वैकल्पिक सप्लाई
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अमेरिका और अल्जीरिया से वैकल्पिक हीलियम आपूर्ति की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। सरकार की कोशिश है कि घरेलू उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया में चुनिंदा देशों हीलियम का उत्पादन करते हैं, इसलिए आपूर्ति श्रृंखला में कोई भी व्यवधान वैश्विक स्तर पर संकट पैदा कर सकता है।
उद्योगों में चिंता बरकरार
उच्च तकनीकी उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हीलियम अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन निर्माण और MRI मशीन संचालन में गैस की कमी से उत्पादन धीमा हो सकता है। उद्योग जगत और सरकार दोनों ही इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय उपायों पर काम कर रहे हैं।
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