कांग्रेस में सियासी संकट और हरीश रावत का दिल्ली दौरा
उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच कांग्रेस पार्टी में सियासी हलचल जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता हरीश रावत कांग्रेस हाईकमान के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे, लेकिन आलाकमान से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि 60 साल की राजनीतिक यात्रा में वह पहली बार स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं।
रावत ने बताया कि वह दिल्ली पहुंचने में विलंबित हो गए, जिसके चलते उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा को संदेश भेजा है। उन्होंने आगामी दिनों में मुलाकात का समय मांगा। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश प्रभारी सैलजा भी दिल्ली के बजाय अंबाला चली गई थीं, जिससे रावत की मुलाकात टल गई।
सोशल मीडिया पर व्यक्त किया दर्द
सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में हरीश रावत ने बताया कि इस 14 अक्टूबर को कांग्रेस के साथ उनके जुड़ने के 58 वर्ष पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ जुड़े 60 साल पूरे होने वाले हैं। रावत ने स्वीकार किया कि इस दौरान उन्होंने कई गलतियां की होंगी, लेकिन पार्टी ने कभी उनसे जवाब नहीं मांगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं स्पष्टीकरण देने के लिए उत्सुक हैं और यह अवसर उनके राजनीतिक जीवन की एक कमी को पूरा करने वाला है। रावत ने यह इच्छा व्यक्त की कि वह पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने अपनी बात रखेंगे।
रोड शो स्थगित करने का निर्णय
हाल ही में कांग्रेस हाईकमान ने हरीश रावत को अपने रोड शो समाप्त करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद रावत ने पहले अपने रोड शो जारी रखे। अब, स्पष्टीकरण देने के लिए आलाकमान से मुलाकात से पूर्व उन्होंने प्रदेश में प्रस्तावित नौ यात्राओं को स्थगित कर दिया है।
रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'मैंने नौ और 'धन्यवाद यात्राओं' की योजना बनाई थी, जिनके लिए लोगों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई थीं। अब इन यात्राओं के स्थगन के कारण आयोजकों और कार्यकर्ताओं को हुई असुविधा के लिए मैं माफी मांगता हूं।'





