कांग्रेस की चिंताएँ और सर्वदलीय बैठक की मांग
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा परिसीमन विधेयक पर दिए गए बयान ने देश की राजनीतिक स्थिति को गर्म कर दिया है। इस पर कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इसके साथ ही, खरगे ने सभी राजनीतिक दलों के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया।
अपने पत्र में खरगे ने सुझाव दिया है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या और राज्यों के लिए सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों के लिए स्थिर रखा जाए। इसके अलावा, उन्होंने 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत प्रभाव से लागू करने की भी मांग की है।
विशेष सत्र की संभावनाएँ
खरगे ने अपने पत्र में 16 जुलाई 2026 को लिखे गए अपने पूर्व पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सर्वदलीय बैठक के लिए आग्रह किया था। उनके अनुसार, हाल ही में केंद्रीय मंत्री के बयान से यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार परिसीमन से संबंधित नए विधेयक के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।
खरगे ने यह भी कहा कि इस संभावना के चलते संसद के मॉनसून सत्र के समापन में लगातार देरी की जा रही है, जिससे यह लगता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
बहुमत का गणित
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 17 अप्रैल 2026 को बजट सत्र के दौरान मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका था। इस विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जिससे यह विधेयक गिर गया।
हालांकि, एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में इस बार मजबूत हुई है। हाल ही में, पंजाब से आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का समर्थन किया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद 20 लोकसभा सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है। सरकार को डीएमके और शरद पवार की पार्टी से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।





