फिरहाद हकीम ने की चुनाव न लड़ने की घोषणा
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने स्पष्ट किया है कि वे आगामी नगर निगम चुनावों में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने ममता बनर्जी के साथ अपने संबंधों और पार्टी के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए, जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला किया।
हकीम ने अपने वफादारी के बावजूद पार्टी में उपेक्षा का अनुभव किया है। उन्होंने कहा, "हमने कभी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा। समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने अपने पुराने साथियों की बजाय अपने परिवार के सदस्यों पर ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया।"
राजनीतिक वफादारी पर बड़ा बयान
राजनीतिक वफादारी के मुद्दे पर चर्चा करते हुए हकीम ने कहा, "अगर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उचित महत्व दिया गया होता, तो आज शुभेंदु अधिकारी TMC के मुख्यमंत्री होते।" उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा नहीं गया है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों में पार्टी ने उनके अनुभव का ठीक से उपयोग नहीं किया है, जिससे उनकी राजनीतिक भूमिका सीमित रह गई।
अपनी उपलब्धियों और मलाल का जिक्र
फिरहाद हकीम ने अपने कार्यकाल के दौरान कोलकाता में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने और उत्तर कोलकाता में जलभराव की समस्या को सुलझाने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। वहीं, इमारत ढहने की घटना को उन्होंने अपने सबसे बड़े मलाल के रूप में रखा, हालांकि यह घटना उनके नियंत्रण में नहीं थी।
उन्होंने कहा, "दुर्गा पूजा के दौरान ममता बनर्जी की कमी महसूस कर रहा हूं। जब भी उनसे मुलाकात होगी, अपनी बात खुलकर रखूंगा।"
नई पीढ़ी के लिए सलाह
फिरहाद हकीम ने नई पीढ़ी को चुनावी राजनीति में आगे आने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि युवा राजनीति में केवल व्यवसाय के लिए नहीं आएं, बल्कि जनता की सेवा के लिए जिम्मेदार पार्षद बनें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को अपने परिवार पर नहीं थोपेंगे और न ही किसी पारिवारिक सदस्य को राजनीति में आने का दबाव डालेंगे।





