नए नियमों का राजनीतिक प्रभाव
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है, जिसके चलते राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि इस बदलाव ने मुख्यमंत्री फडणवीस को 'सुपर सीएम' बना दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 अगस्त को 'महाराष्ट्र शासकीय कार्य नियमावली, 2026' को अधिसूचित किया, जो स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले आया। इस बदलाव ने सत्ता में तकरार की अटकलों को जन्म दिया है।
नए नियमों के तहत, 1975 से लागू पुराने नियमों को प्रतिस्थापित किया गया है। इसके माध्यम से मुख्यमंत्री को किसी भी विभागीय मंत्री के निर्णय को पलटने का 'वीटो' अधिकार प्राप्त हुआ है। हालांकि, इसके लिए उन्हें यह साबित करना होगा कि यह कदम जनहित में है और उन्हें लिखित रूप में भी कारणों को दर्ज करना होगा।
1975 के नियमों में संशोधन
पुराने नियमों के स्थान पर नए ढांचे ने सरकारी कार्यों के संचालन में स्पष्टता प्रदान की है। 2026 के नए नियम मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच अधिकारों के बंटवारे को और स्पष्ट करते हैं, विशेषकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में। मुख्यमंत्री को विभागीय निर्णयों की समीक्षा करने और जनहित में उनमें परिवर्तन करने का अधिकार दिया गया है।
यह बदलाव 2023 में एक महत्वपूर्ण अदालती निर्णय से प्रेरित है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि मुख्यमंत्री के पास किसी मंत्री के स्वतंत्र निर्णय को पलटने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह निर्णय मुख्यमंत्री के अधिकारों के संदर्भ में कानूनी खामियों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण था।
नए नियमों की विशेषताएँ
'महाराष्ट्र शासकीय कार्य नियमावली, 2026' के तहत मुख्यमंत्री की शक्तियाँ काफी बढ़ गई हैं। अब मुख्यमंत्री को किसी भी मंत्री के निर्णय को पलटने का अधिकार प्राप्त है, हालांकि यह न्यायिक मामलों पर लागू नहीं होता। नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री जनहित के आधार पर निर्णय बदल सकते हैं।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री को विभिन्न विभागों से फाइलें मंगाने का अधिकार भी मिला है, जिससे वह किसी भी दस्तावेज अथवा सामग्री की मांग कर सकते हैं। यदि सभी मंत्री सहमत हों, तो बिना औपचारिक बैठक के भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव और वित्त विभाग की भूमिका
नए नियमों के अधीन, मुख्य सचिव की भूमिका को भी सशक्त किया गया है। यदि कोई प्रस्ताव कानूनी या सरकारी नीति के खिलाफ हो, तो वह मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री को सलाह देने का अधिकार रखता है। वित्तीय प्रभाव वाले आदेशों के लिए वित्त विभाग की पूर्व सहमति आवश्यक कर दी गई है।
इसके अलावा, राज्यपाल की भूमिका को भी नए नियमों में स्थान दिया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री को कई महत्वपूर्ण मामलों में राज्यपाल के पास प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा।
महायुति गठबंधन में संभावित तनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर इसे सुधार के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव गहरा है। 2023 में जिन अधिकारों को चुनौती दी गई थी, वे अब एकनाथ शिंदे के उपमुख्यमंत्री बनने पर भी प्रभावी हैं। इससे महायुति गठबंधन में तनाव बढ़ने की संभावना है, जो सत्ता के सख्त बंटवारे का संकेत देता है।





