विवादास्पद मांग का उठना
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय के प्रमुख मंत्री आधव अर्जुन के एक बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। अर्जुन ने मांग की है कि तमिलनाडु का एक अलग ध्वज होना चाहिए, जिसे राष्ट्रीय ध्वज के समान मान्यता दी जाए। उनकी इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, और आरोप लगाया है कि इससे 'अलगाववादी मानसिकता' को बढ़ावा मिल सकता है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता पी. सेल्वम ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि तमिल पहचान को साबित करने के लिए राज्य को नए झंडे की आवश्यकता नहीं है। सेल्वम ने कहा, "हमारी भाषा ने आपके झंडे का इंतजार नहीं किया। हमारी सभ्यता को आपके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। भारतीय तिरंगे के नीचे हमारी तमिल पहचान छोटी नहीं होती।"
मंत्री की मांग और उसके तर्क
आधव अर्जुन ने शनिवार को यह मांग उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को इस नए झंडे को सबसे पहले फहराना चाहिए। इसके बाद, उन्होंने प्रस्तावित किया कि यह ध्वज राज्य के हर घर में फहराया जाना चाहिए। अर्जुन ने इस झंडे में तमिलनाडु को प्राथमिकता देने की बात की और सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को इसे 18 जुलाई और 1 नवंबर को फहराना चाहिए, जो तमिलनाडु के इतिहास में महत्वपूर्ण तिथियां हैं।
उन्होंने कहा कि यह झंडा राज्य की पहचान को मजबूती प्रदान करेगा और तमिल संस्कृति को दर्शाएगा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री की समान मांग
आधव अर्जुन की यह मांग ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने राज्य के लिए एक अलग झंडे की मांग की है। शिवकुमार ने कहा कि उनकी सरकार आगामी बेलगावी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा करेगी और इसके लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव दिया है।
2018 में, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के समय भी नए झंडे की मांग उठी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया था।
इतिहास में झंडे की मांग
तमिलनाडु में अलग झंडे की मांग कोई नई बात नहीं है। दिवंगत नेता करुणानिधि ने 1970 में राज्य के लिए अलग झंडे की बात की थी और इसके लिए केंद्र से मंजूरी मांगी थी। हालांकि, इंदिरा गांधी की सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
करुणानिधि की डिज़ाइन में एक ग्रे बैकग्राउंड था, जिसमें भारतीय तिरंगा और राज्य के मंदिर-गोपुरम का प्रतीक चिह्न शामिल था। लेकिन, फिर भी इस प्रस्ताव को मान्यता नहीं मिली।





