मंत्री की उल्फा की प्रशंसा पर विवाद
असम सरकार में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वजीत दैमारी उग्रवादी संगठन उल्फा की तारीफ कर विवादों में घिर गए हैं। इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दैमारी का बचाव करते हुए कहा है कि उनका आशय उस उल्फा गुट से था जिसने सरकार के साथ शांति समझौता किया है। दैमारी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि उल्फा ने 'पांच दशकों से अधिक समय तक राज्य को बाहरी ताकतों से बचाया।'
इस घटनाक्रम के बीच जब विवाद बढ़ा, तो मुख्यमंत्री सरमा ने मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि अब उल्फा तकनीकी रूप से प्रतिबंधित संगठन नहीं है। उन्होंने उल्फा के कट्टरपंथी गुट की तुलना करते हुए कहा कि यह गुट अब वार्ता प्रक्रिया से बाहर है और अपना नाम उल्फा (स्वतंत्र) रख लिया है।
मंत्री का बयान और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
यह विवाद तब सामने आया जब एक वीडियो में मंत्री दैमारी उल्फा की प्रशंसा करते हुए दिखाई दिए। तिनसुकिया के काकोपाथर इलाके में मटक युवा छात्र सम्मेलन के आयोजन के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की आलोचनाओं के बावजूद, 'भूमिगत संगठन की वजह से ही कोई ताकत असम को अस्थिर नहीं कर सकी।' उन्होंने यह भी कहा कि उल्फा का मूल नेतृत्व मोरान और मटक समुदायों से संबंधित था।
जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से दैमारी के बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर मंत्री से बातचीत की है, हालांकि उन्होंने स्वयं वीडियो नहीं देखा है। उनके अनुसार, दैमारी का आशय उल्फा के उस गुट से था जो शांति के रास्ते पर लौट आया है, न कि परेश बरुआ के गुट से।
उल्फा का इतिहास और असम में प्रतिबंध
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) की स्थापना 7 अप्रैल 1979 को असम को भारत से अलग एक स्वतंत्र राज्य बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यह एक अलगाववादी संगठन है जिसका लक्ष्य भारत सरकार के साथ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से एक स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना करना था। भारत सरकार ने 1990 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे आतंकवादी घोषित कर दिया।
समय के साथ, यह संगठन दो गुटों में बंट गया। एक गुट, जिसका नेतृत्व अरबिंद राजखोवा ने किया, सरकार से बातचीत के पक्ष में था और दिसंबर 2023 में इस गुट ने सरकार के साथ समझौता किया। वहीं, दूसरा गुट, जो परेश बरुआ के नेतृत्व में है, अभी भी उल्फा इंडिपेंडेंट के नाम से सक्रिय है।





