पनामा असेंबली के अध्यक्ष डाना कास्टानेडा से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए थरूर ने बताया कि उन्होंने कश्मीर के पहलगाम की एक पारंपरिक शॉल पनामा असेंबली अध्यक्ष को भेंट की। यही वह स्थान है जहां हाल ही में आतंकी हमला हुआ था। थरूर ने कहा, “यह शॉल उस जगह की है जहां हमने अपने नागरिक खोए। पनामा के राष्ट्रपति ने हमें 'योद्धाओं का प्रतीक' भेंट किया और आशा जताई कि हम आतंकवाद के खिलाफ उसी ताकत से लड़ेंगे। यह एक भावनात्मक और शक्तिशाली क्षण था।”
शशि थरूर ने यह भी कहा कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल सभी नेता भले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों से आते हों, लेकिन देश की सुरक्षा और एकता के मुद्दे पर सभी एक साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला किया, जिसमें कई निर्दोषों की जान गई। हमने देखा कि क्या पाकिस्तान इस पर कोई कार्रवाई करेगा, लेकिन जब यह स्पष्ट हो गया कि वह आतंकियों के साथ खड़ा है, तब भारत ने दो सप्ताह बाद पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों पर निर्णायक हमला किया।”
थरूर ने कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता भी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “हमने युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी है कि देश के भीतर होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोका जाए।”





