कांग्रेस का आक्रामक रुख
धल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद 'शुद्धीकरण' के मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इस विषय पर एक आक्रामक रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है, जिसका उद्देश्य 2027 में होने वाले उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसे बनाए रखना है। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में दलित मतदाता इस मुद्दे से प्रभावित हो सकते हैं।
2024 के आम चुनाव में 'संविधान खतरे में है' का नारा लगाते हुए इंडिया गठबंधन ने दलित वोटरों में कुछ हद तक भरोसा प्राप्त किया था, जिसे कांग्रेस अब एक अवसर के रूप में देख रही है।
उत्तराखंड में चुनावी स्थिति
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य की 70 सीटों में से 15 सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि दलित मतदाता लगभग दो दर्जन सीटों पर प्रभाव डालते हैं। हरिद्वार और उधम सिंह नगर की सीटों पर दलित-मुस्लिम वोटों का गठबंधन चुनाव परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
2022 के चुनावों में कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 13 में से केवल दो सीटें जीतीं। 2017 के चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। ऐसे में पार्टी को विश्वास है कि 'शुद्धीकरण' मुद्दे के जरिए दलित वर्ग का समर्थन प्राप्त कर सकेगी।
उत्तर प्रदेश और पंजाब में दलित मतदाता
उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता लगभग 22 प्रतिशत हैं, जहां विधानसभा की 403 सीटों में से 86 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2022 में कांग्रेस ने केवल दो सीटें जीतीं, जिनमें एक भी आरक्षित सीट शामिल नहीं थी। हालांकि, पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी सुरक्षित सीट जीतने में सफलता प्राप्त की।
पंजाब में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 34 सीटें आरक्षित हैं, लेकिन दलित मतदाता 50 सीटों पर प्रभाव डालते हैं। दोआबा क्षेत्र जैसे जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला में दलित मतदाताओं की संख्या 30 से 40 प्रतिशत है। 2022 के पंजाब चुनाव में कांग्रेस केवल तीन सीटें ही जीत सकी।
खरगे का पत्र और कार्रवाई की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देश देने का आग्रह किया है कि 'शुद्धीकरण' की घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।
खरगे ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि 24 दिन बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।





