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कलेक्टरों को मिला भारतीय नागरिकता देने का अधिकार, 8 राज्यों में लागू होंगे नए नियम

केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जिसके तहत आठ राज्यों के जिला कलेक्टर नागरिकता आवेदनों की जांच कर उन्हें स्वीकृति दे सकेंगे। यह बदलाव प्रमुख रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता

कलेक्टरों को मिला भारतीय नागरिकता देने का अधिकार, 8 राज्यों में लागू होंगे नए नियम
फोटो: कलेक्टरों को मिला भारतीय नागरिकता देने का अधिकार, 8 राज्यों में लागू होंगे नए नियम

नागरिकता प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। गृह मंत्रालय ने नए नियमों के तहत छह सीमावर्ती राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टरों को नागरिकता देने का अधिकार प्रदान किया है। इसके अनुसार, संबंधित कलेक्टर नागरिकता के लिए प्राप्त आवेदनों की समीक्षा कर, उन पर निर्णय लेने और नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को पूरा कर सकेंगे।


यह परिवर्तन मुख्य रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने में होने वाली देरी को कम करने हेतु किया गया है। नए प्रावधान नागरिकता अधिनियम की धारा 6बी के अंतर्गत पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए आवेदन पर लागू होंगे।


कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश होंगे प्रभावित?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के अनुसार, यह व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू होगी। हालांकि, असम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है।


इस नियम के तहत, आवेदकों को अब नागरिकता के लिए अपने आवेदन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संबंधित कलेक्टर के पास जमा करने होंगे, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।


कलेक्टर की नई जिम्मेदारियाँ

नए नियमों के अनुसार, जिला कलेक्टर नागरिकता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आवेदनों की प्राप्ति के बाद, कलेक्टर संबंधित दस्तावेजों की जांच करेंगे और आवश्यक होने पर आवेदक की पात्रता की पुष्टि के लिए अन्य जांच भी कर सकेंगे।


इसके अतिरिक्त, कलेक्टर नागरिकता अधिनियम की दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट निष्ठा की शपथ भी आवेदकों से लेंगे। यदि कोई आवेदक निर्धारित समय सीमा के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने में विफल रहता है, तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है।


पहले की व्यवस्था और बदलाव

पहले नागरिकता देने का अधिकार सशक्त समिति और जिला-स्तरीय समिति के पास था। नए संशोधनों के अनुसार, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लंबित धारा 6बी के सभी आवेदन अब संबंधित कलेक्टरों को ट्रांसफर किए जाएंगे।


इस प्रक्रिया के तहत, आवेदकों को अपने आवेदन को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संबंधित कलेक्टर के पास भेजना होगा।


नियमों में अन्य आवश्यक परिवर्तन

केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों में कई अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन भी किए हैं। नियम 14 और 15 में सशक्त समिति के संदर्भ के साथ कलेक्टर को शामिल किया गया है, और नियम 38 में भी कलेक्टर का उल्लेख किया गया है।


इसके अलावा, अनुसूची-1 में दिए गए फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है, जिससे आवेदकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। अब आवेदकों द्वारा भरे गए फॉर्म संबंधित कलेक्टर को जमा किए जाएंगे, जो नियम 11ए के तहत इन आवेदनों पर निर्णय लेंगे।


नागरिकता अधिनियम से संबंधित आदेश

गृह मंत्रालय ने यह अधिसूचना नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत जारी की है। नागरिकता के मूल नियमों को फरवरी 2009 में अधिसूचित किया गया था और इन नियमों में अंतिम संशोधन 18 मई 2026 को किया गया था।


इसके अलावा, 19 अगस्त को गृह मंत्रालय ने एक अलग आदेश भी जारी किया, जिसमें निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित धारा 6बी के आवेदनों को संबंधित कलेक्टरों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।