मुख्यमंत्री का अनोखा कदम
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका ध्यान किसी विवाद या विपक्ष के हमले की बजाय उनके एक अनोखे काम की वजह से खींचा गया है। आमतौर पर, मुख्यमंत्री विधानसभा में अपनी निर्धारित सीट पर ही बैठते हैं, लेकिन विजय ने गुरुवार को अपनी कुर्सी छोड़कर कैबिनेट मंत्रियों के पास जाकर बैठने का निर्णय लिया। उनका यह कदम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
विधानसभा की बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री विजय अपनी कुर्सी पर बैठने के बाद कुछ ही समय में उठकर मंत्रियों की सीटों की ओर बढ़ गए। वहाँ जाकर उन्होंने मंत्रियों से चर्चा भी की, जो उनके इस कदम को और भी खास बनाता है।
विधानसभा की परंपराओं का उल्लंघन
विधानसभा में मुख्यमंत्री के लिए एक निर्धारित सीट होती है, जो स्पीकर की कुर्सी के पास स्थित होती है। यहाँ पर बैठना मुख्यमंत्री की भूमिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामान्यतः, मंत्रियों को अपनी वरिष्ठता के आधार पर आसन्न सीटों पर बैठने की व्यवस्था होती है। विजय का मंत्रियों के बगल में बैठना इस परंपरा से हटकर है।
वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मुख्यमंत्री विजय मंत्री के. ए. सेंगोट्टैयन और आधव अर्जुन के बीच बैठ जाते हैं, जो कि पहले कभी भी किसी मुख्यमंत्री द्वारा नहीं किया गया। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे उदाहरण इतिहास में नहीं मिले हैं।
नवीनतम निर्णय और योजनाएँ
थलपति विजय ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के 100 दिन पूरे कर लिए हैं, और इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उनकी छवि एक भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में उभरी है, और उनके द्वारा लागू की गई योजनाएँ जैसे कि मैटरनिटी लीव में वृद्धि और सरकारी अस्पतालों में जन्मी बच्चियों को सोने की अंगूठी देना, उन्हें जननायक के रूप में स्थापित कर रही हैं।
हाल ही में, उन्होंने घोषणा की कि तीसरे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 365 दिन किया जाएगा। इसके साथ ही, विधायकों के लिए एक नई योजना के तहत सभी को सरकारी गाड़ियों और ₹1 लाख के मासिक पैकेज का लाभ देने का भी ऐलान किया गया है। इस पैकेज में ₹75,000 ईंधन, रखरखाव और ड्राइवर के खर्च के लिए और ₹25,000 ऑफिस के काम के लिए असिस्टेंट के खर्च शामिल हैं।





