सस्ते चावल योजना: FCI की चावल बिक्री में बड़ा अंतर
सस्ते चावल योजना: भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने एथेनॉल डिस्टिलरियों को अपनी औसत खरीद मूल्य से लगभग 40 प्रतिशत कम कीमत पर चावल बेचा है। मंगलवार को राज्यसभा में सरकार ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी पेश की।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने सांसद अशोक सिंह के लिखित सवाल के जवाब में बताया कि जून 2025 से जून 2026 के बीच FCI ने एथेनॉल प्लांट को 2,250 रुपये से 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर चावल बेचा, जबकि इसी अवधि में सरकार की औसत खरीद लागत 3,720 रुपये से 3,889 रुपये प्रति क्विंटल थी।
चावल का वितरण और प्रमुख राज्य
राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, FCI ने पिछले 12 महीनों में एथेनॉल प्लांट को कुल 63.5 लाख टन (6.35 मिलियन टन) चावल भेजा है, जिसकी कुल कीमत 14,596.78 करोड़ रुपये है।
सस्ते चावल योजना: हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा मध्य प्रदेश उन शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं, जहां से एथेनॉल प्लांट ने सबसे अधिक चावल प्राप्त किया। हरियाणा को 8,44,141 टन, उत्तर प्रदेश को 8,38,645 टन और पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश को संयुक्त रूप से 6,58,952 टन चावल मिला।
खरीद और बिक्री मूल्य का अंतर
FCI की खरीद लागत 2024-25 में 3,719.72 रुपये प्रति क्विंटल और 2025-26 के संशोधित अनुमान में 3,889.46 रुपये प्रति क्विंटल रही। एथेनॉल प्लांट को ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत चावल की बिक्री की दरें भी निर्धारित की गई हैं। जून से अक्टूबर 2025 तक यह कीमत 2,250 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।
इसके बाद नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के लिए यह बढ़ाकर 2,320 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई, जबकि नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए इसे 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तय किया गया है।
सरकार का स्पष्टीकरण और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
सस्ते चावल योजना: सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि एथेनॉल उत्पादकों को कोई सब्सिडी नहीं दी जा रही है और चावल को OMSS (D) की निर्धारित कीमत पर ही बेचा जा रहा है। हालांकि, खरीद लागत और बिक्री मूल्य के बीच बड़े अंतर के कारण की जानकारी नहीं दी गई।
कृषि विशेषज्ञ जीके सूद ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्थिक लागत से कम पर चावल बेचना एक तरह की प्रभावी सब्सिडी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों इतनी अधिक सब्सिडी वाले चावल को एथेनॉल के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि यह कीमतें ईंधन की कीमतों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई हैं।
हेराफेरी के मामले और सरकार की नीतियाँ
राज्यसभा में दिए गए उत्तर में यह भी बताया गया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे गए FCI के चावल में हेराफेरी के दो मामले सामने आए हैं। राज्य के खाद्य विभागों ने इन डिस्टिलरियों के खिलाफ कार्रवाई की है और FCI ने उन्हें आगे चावल का आवंटन रोक दिया है। हालांकि, इन डिस्टिलरियों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
सस्ते चावल योजना: यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को तेजी से बढ़ा रही है। FCI के पास मौजूद सरप्लस चावल का उपयोग इस दिशा में किया जा रहा है, और 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए 7.2 मिलियन टन चावल आवंटित किया गया है।
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