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चंद्र कुमार बोस ने जेन-Z के लिए बनाई नई आजाद हिंद पार्टी।

चंद्र कुमार बोस: हाल ही में जंतर-मंतर पर आयोजित जेन-Z प्रदर्शनों ने देश की राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल उत्पन्न कर दी है। बड़े राजनीतिक दलों का ध्यान

चंद्र कुमार बोस ने जेन-Z के लिए बनाई नई आजाद हिंद पार्टी।
फोटो: chandra kumar bose

जेन-Z प्रदर्शनों से उपजी राजनीतिक हलचल

चंद्र कुमार बोस: हाल ही में जंतर-मंतर पर आयोजित जेन-Z प्रदर्शनों ने देश की राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल उत्पन्न कर दी है। बड़े राजनीतिक दलों का ध्यान इस समय युवाओं की ओर केंद्रित हो गया है, जो अपनी ऊर्जा का लाभ उठाने की होड़ में हैं। इस बीच, छात्र आंदोलनों की अगुवाई कर रहे अभिजीत दीपके ने हाल में कहा कि वे इसे एक राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे।


इस अवसर का लाभ उठाते हुए, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने जेन-Z के लिए एक नई राजनीतिक पार्टी की स्थापना की घोषणा की है।


नई आजाद हिंद पार्टी का उद्देश्य

रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस से मोहभंग होने के बाद चंद्र कुमार बोस ने अपनी नई पार्टी का नाम आजाद हिंद पार्टी रखा है। उनका दावा है कि यह पार्टी पूरी तरह से जेन-Z युवाओं और नेताजी की विचारधारा पर आधारित होगी।


इंडिया टुडे से बातचीत में चंद्र बोस ने कहा कि आजादी के 80 सालों बाद देश का युवा एक बार फिर सड़कों पर उतर रहा है और उसे लीडरशिप की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर के प्रदर्शनों में युवाओं के जज्बे और भावना को देखा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग में भ्रष्टाचार एक जीवन शैली बन चुका है। सभी राजनीतिक दल इसमें शामिल हैं।'


मौजूदा व्यवस्था से असंतोष

चंद्र कुमार बोस ने आगे कहा, 'देश का युवा मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था से तंग आ चुका है और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहता है। नेताजी की आजाद हिंद फौज और आजाद हिंद पार्टी के बैनर तले लड़ने से बेहतर और क्या हो सकता है?' उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आजाद हिंद पार्टी एक समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील विचारधारा वाले युवाओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी।


चंद्र बोस का राजनीतिक सफर

चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। उन्होंने 2016 में भाजपा में प्रवेश किया, जहां उन्हें नेताजी की विचारधारा के प्रसार के लिए आजाद हिंद मोर्चा बनाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन जब सात साल तक यह मोर्चा नहीं बना, तो उन्होंने भाजपा छोड़ दी।


इसके बाद, अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन वहां भी पार्टी की आंतरिक राजनीति और व्यक्तिगत कारणों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने अपनी खुद की पार्टी की स्थापना करने का ऐलान किया है।


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