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जमीनी कर्मियों पर बोझ? MP में 10 दिनों में 9 BLO की मौत पर उठ रहे सवाल!

मध्यप्रदेश में SIR के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले दस दिनों में मध्यप्रदेश में 9 BLO की मौत की खबरें आ चुकी हैं। कर्मचारी |

जमीनी कर्मियों पर बोझ? MP में 10 दिनों में 9 BLO की मौत पर उठ रहे सवाल!
फोटो: Madhya Pradesh BLO pressure , MP BLO deaths
बिहार चुनाव के बाद देश के अन्य 12 राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के बीच बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO's) की मौतें चिंता का कारण बन गई हैं। बीते दस दिनों में मध्यप्रदेश के कई अन्य जिलों से 9 BLO की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।

मृतकों के परिवार वालों का आरोप है कि काम का दबाव और लगातार सर्वे, सर्वर डाउन और रात तक काम के कारण तनाव के वजह से वह ऐसा कदम उठा रहे हैं। कई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं। कर्मचारी संगठनों और परिवार वालों का कहना है इसकी वजह अत्यधिक बोझ और तनाव है। वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि मौतों का कारण बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों की अनदेखी है । ऐसे में सवाल बनता है कि क्या सचमुच यह आत्महत्या है या सिस्टम का प्रेशर ?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों को प्रदेश में कुल 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार वोटर्स के फॉर्म डिजिटलाइज करने हैं। इस काम में 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफिसर की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन लगातार काम के तनाव की वजह से उनकी जान पर बन आई है।

मध्यप्रदेश BLO पर अतिरिक्त काम का दबाव


मध्यप्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत 4 नवंबर से इसकी शुरुआत हो चुकी है। कई जिलों में एसआईआर का काम काफी पिछड़ा है। यदि भोपाल की बात करें तो अब तक 37 प्रतिशत फॉर्म का ही डिजिटलाइजेशन हुआ है। यानी, जो फॉर्म वोटर्स को घर-घर जाकर दिए गए थे, उन्हें कलेक्ट कर 7.40 लाख फॉर्म ही ऑनलाइन हुए हैं।

बाकी 63 प्रतिशत काम अगले 10 दिन में निपटाना है। ऐसे में बीएलओ की चिंता और घबराहट दोनों ही बढ़ हुई है, क्योंकि काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो निलंबित होने का डर है। इसलिए बीएलओ सदमे में है। सर्वर डाउन होने की वजह से उनकी चिंता और भी बढ़ गई है, जिससे वे बीमार भी हो रहे हैं।

मध्यप्रदेश में बीएलओ की मौत के मामले


मध्य प्रदेश में 10 दिन में 9 BLO की मौत के मामले सामने आए हैं। जिनमें शहडोल जिले के सोहागपुर में BLO मनीराम नापित (उम्र 54 वर्ष) की सोमवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद घर लौटे ही थे कि एक अधिकारी का फोन आया उसके बाद से तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। मेडिकल कॉलेज पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

दूसरा मामला नर्मदापुरम जिले के पिपरिया से है। जहाँ सहायक शिक्षक सुजान सिंह रघुवंशी एसआईआर सर्वे के अतिरिक्त बोझ को सह नहीं पाए और काम से लौटने के दौरान चलती ट्रेन के आगे जिंदगी की रेस में हार गए। वे गर्ल्स स्कूल पिपरिया में पदस्थ थे।

रीवा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वीणा मिश्रा (उम्र 55) की सीधी जिले के रामपुर नैकिन में एसआईआर कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। हालांकि तीन दिन पहले भी उन्हें अटैक आया था। परिजनों का कहना है कि अधिकारियों ने छुट्टी नहीं दिया इलाज के लिए बल्कि और काम का दबाव बनाया। काम करते हुए ही उन्हें तेज सीने में दर्द हुआ और वे मौके पर गिर पड़ीं। संजय गांधी अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार ने अधिकारियों पर लापरवाही व दबाव का आरोप लगाया है।

इसके अलावा मंडीदीप से रमाकांत पांडे, झाबुआ से भुवान सिंह चौहान, दमोह में सीताराम गोंड, बालाघाट विधानसभा क्षेत्र में बोट्टा की बीएलओ और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता नागेश्वर, के साथ ही कई अन्य बीएलओ कार्यकर्ताओं को हार्ट अटैक से जान गंवानी पड़ी है। यह घटनाएं सिस्टम पर कड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

क्या कहना है मध्यप्रदेश में SIR का काम कर रहे बीएलओ ऑफिसरों का? 


मध्यप्रदेश BLO मौत के बढ़ते आंकड़ों के बारे में सीहोर जिले के बीएलओ राकेश कुमार भारिया (बदला हुआ नाम) से जब हमने फ़ोन पर बात करनी चाही तो पहली बार में वह फ़ोन उठाए नहीं। दूसरी-तीसरी बार में जब बात हुई भी तो वह अत्यधिक काम के प्रेशर से तनाव में थे। उनका कहना था सुबह 9 बजे से जो काम की शुरुआत होती है वह रात तक चलती रहती है। घर आने के बाद भी फॉर्म भरने से संबंधित फ़ोन आते रहते हैं।

आगे वह बताते हैं कम समय में डिजिटलीकरण, सर्वे, नाम-काटने आदि काम का बोझ असामान्य रूप से बढ़ा दिया गया है, जिसकी वजह से बीएलओ ऑफिसरों को मानसिक और शारीरिक दबाव झेलना पड़ रहा है।

एक अन्य बीएलओ महिला ऑफिसर का कहना है मजिस्ट्रेट को अपनी परेशानी बताने के बावजूद वह इस पर कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं। फील्ड में लोगों की तरफ़ से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। फॉर्म देने जाना लेने जाना उसके बाद उसे भरने का काम भी हम पर पड़ गया है। फील्ड पर कई जगह गलत बर्ताव और बदसूलुकी करते हैं लोग। घर-परिवार पर भी इसका असर उल्टा पड़ रहा है। फील्ड में जाओ तो लोग दरवाजे से लौटा देते हैं। फॉर्म लेना नहीं चाहते हैं। फोन नंबर डाल दिया गया है, तो कोई भी कभी भी कॉल कर देता है। जहाँ हमारा फ़ोन नंबर डाला गया है वहाँ फ़ोन करने का समय भी डालना चाहिए था।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमें बीएलओ कर्मचारी/शिक्षक यूनिएन से बातचीत में यही सुनने को मिला कि SIR सर्वे को “एक-दो दिन की पोलिंग” जैसा नहीं समझा जाए क्योंकि यह महीनों तक चलने वाला काम है। उन्हें पर्याप्त समय, आराम, स्वास्थ्य सुविधाएं दिया जाना चाहिए। काम का प्रेशर भी कम किया जाना चाहिए। मृत परिवारों को भी बयानबाजी से इतर जल्द ही मुहैया की राशि दी जानी चाहिए।

मुआवजे की मांग


मध्यप्रदेश में BLO मौत के मामले चौंकाने वाले आए हैं। जिससे इस फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों में डर और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है। इसलिए इसलिए 10 अप्रैल 2019 के आदेश के तहत मध्यप्रदेश वर्ग कर्मचारी संघ ने नई दिल्ली चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है और मुआवजे की मांग की है। SIR की प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को 15 लाख रुपए तथा घायल और बीमार होने वालों को अस्पताल का खर्च मुफ़्त में कराने की मांग की गई है।इससे फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों में डर और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है। यह चुनाव से जुड़ा काम ही है।

कब तक चलेगा SIR?


मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा क्षेत्रों में 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का कार्य चल रहा है। निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक मध्यप्रदेश में बीएलओ 4 दिसंबर तक हर घर जाकर फॉर्म बांटने और भरकर ले जाने की प्रक्रिया पूरी करनी है। कम समय और फील्ड पर लोगों की मदद न मिलने के कारण मध्यप्रदेश BLO प्रेशर में हैं। इसके बाद 9 दिसंबर तक ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने की घोसणा की गई है।

ड्राफ्ट लिस्ट में जिन लोगों के नाम नहीं दिखेंगे, वे अपनी आपत्ति या दावा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दर्ज करा सकेंगे। अगर वहां भी मामला खारिज हो जाता है, तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के सामने दूसरी अपील करने का अवसर रहेगा।

एसआईआर प्रगति रिपोर्ट में एमपी का स्थान


मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन को लेकर नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 नवंबर दोपहर 12 बजे तक मध्य प्रदेश ने 72.29% काम पूरा कर लिया है। इससे राज्य देशभर में चौथे स्थान पर पहुंचा है। हालांकि बीएलओ को सर्वर की समस्या, लगातार फील्ड विजिट और हजारों रिकॉर्ड के पुनः सत्यापन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं राजस्थान देश में पहले स्थान पर है, जहां 3,000 से अधिक बूथों पर 100% डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। जहाँ एक ओर खंडवा में SIR में 100% काम पूरा करने वाले BLO को जिला प्रशासन ने सम्मानित किया है वहीं दूसरी ओर शडहोल, नर्मदापुरम, सोहागपुर आदि जिलों से मध्यप्रदेश बीएलओ मौत की खबरें चौंकाने वाली आयी हैं।

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