विपक्ष की रैली का जवाब
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाली विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की महापारिवारिक रैली के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक रणनीति तैयार की है। इस रैली के दौरान विपक्ष ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर अपनी बात रखी थी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी इस अवसर पर विपक्ष के नैरेटिव को सीधे जनता के बीच जाकर खारिज करने के लिए एक व्यापक अभियान का आयोजन करने जा रही है। पार्टी के केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रमुख नेता 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' के नारे के तहत सड़कों पर उतरकर पदयात्राएं करेंगे।
पदयात्राओं की योजना
बीजेपी ने इस अभियान की तिथियों और नेताओं की तैनाती की योजना को भी स्पष्ट कर दिया है। 1 नवंबर को, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शिमला में पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे।
इसके बाद, 2 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा हैदराबाद में पदयात्रा करेंगे, जबकि 5 नवंबर को गृह मंत्री शाह और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करनाल में पदयात्रा करेंगे।
व्यापक स्तर पर आयोजन
बीजेपी के इस मेगा अभियान में हर जिला मुख्यालय पर पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 10,000 लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस बड़े स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का समन्वय बीजेपी नेता नितिन नवीन के नेतृत्व में एक चार-सदस्यीय टीम करेगी।
इस टीम में तरुण चुग, भूपेंद्र यादव, हरीश द्विवेदी, और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं। पदयात्राओं के माध्यम से बीजेपी आम जनता को वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनावी निष्पक्षता के प्रति जागरूक करेगी।
सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ
यह राजनीतिक जंग 'वोट चोरी' के दावों के साथ शुरू हुई है, जिसमें विपक्ष ने चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत लगभग 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में 'इंडिया' ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में रैली की।
बीजेपी का कहना है कि विपक्ष हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगा रहा है, जिससे देश में भ्रम और अराजकता का माहौल उत्पन्न हो रहा है। बीजेपी की पदयात्राएं 1 नवंबर को रामलीला मैदान से शुरू होने वाले राजनीतिक तूफान का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक प्रयास का हिस्सा हैं।





