Molitics Logo
होम राष्ट्रीय बिहार चुनाव 2025: प्रशांत किशोर का “Angry Bihari” अभियान, क्या वाकई जनता इतनी नाराज़ है?
राष्ट्रीय

बिहार चुनाव 2025: प्रशांत किशोर का “Angry Bihari” अभियान, क्या वाकई जनता इतनी नाराज़ है?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में एक नया नारा गूंज रहा है — “Angry Bihari”। यह नारा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि चुनाव रणनीतिकार से |

बिहार चुनाव 2025: प्रशांत किशोर का “Angry Bihari” अभियान, क्या वाकई जनता इतनी नाराज़ है?
फोटो: Nitish Kumar, Bihar Assembly Elections 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में एक नया नारा गूंज रहा है — “Angry Bihari”। यह नारा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का है। अपने जन सुराज अभियान (Jan Suraaj Yatra) के जरिए प्रशांत किशोर जनता के गुस्से को एक राजनीतिक स्वरूप देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में आम बिहारी इतना नाराज़ है जितना यह अभियान दिखा रहा है?

“Angry Bihari” अभियान की पृष्ठभूमि


प्रशांत किशोर ने अपने नए राजनीतिक अभियान में कहा है कि बिहार की जनता पिछले 30 वर्षों से एक ही राजनीतिक चक्र में फंसी हुई है। उन्होंने नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और भाजपा — तीनों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की जनता “थकी और नाराज़” है। उनके मुताबिक, बिहार में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर विकास की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते हुए इस अभियान का मकसद है “राजनीति में बदलाव” लाना। पीके का कहना है कि अब बिहार को नई सोच, नई नीति और नए नेतृत्व की ज़रूरत है। उनके अनुसार, “Angry Bihari” सिर्फ गुस्से का प्रतीक नहीं, बल्कि परिवर्तन की इच्छा का संकेत है।

ज़मीनी हकीकत क्या कहती है?


हालांकि, रिपोर्टों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ज़मीन पर कहानी कुछ अलग है। कई जिलों में जनता सरकार से नाराज़ जरूर है, लेकिन “गुस्सा” उतना प्रबल नहीं दिखता जितना अभियान पेश करता है। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे लोगों के बीच ज़रूर हैं, परन्तु वे अब भी पारंपरिक दलों पर भरोसा करते हैं।

कई मतदाताओं का मानना है कि प्रशांत किशोर का “जन सुराज अभियान” एक अच्छी पहल है, लेकिन इसे अभी लंबा रास्ता तय करना है। लोगों की नज़र इस बात पर है कि क्या पीके का यह आंदोलन 2025 के चुनाव में ठोस राजनीतिक शक्ति में बदल पाएगा या नहीं।

विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया


जेडीयू (JDU) और राजद (RJD) दोनों ने प्रशांत किशोर के अभियान को “राजनीतिक ड्रामा” करार दिया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि प्रशांत किशोर को जनता का मूड समझने में गलती हो रही है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने कहा कि बिहार में लोगों का गुस्सा असली है, लेकिन यह किसी व्यक्ति या अभियान के कारण नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी विकास की कमी के कारण है।

निष्कर्ष


“Angry Bihari” अभियान ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। यह नारा आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन भावना को कितना प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि प्रशांत किशोर ने राज्य के राजनीतिक विमर्श को एक नई दिशा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जनता इस गुस्से को वोट में बदलती है या यह सिर्फ एक भावनात्मक प्रचार तक सीमित रह जाता है।

Read This Also:- गुरु नानक जयंती: पाकिस्तान ने 14 भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को हिन्दू बताकर ननकाना साहिब जाने से रोका