Molitics Logo
होम राष्ट्रीय भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: 2020 का मामला फिर खोलने से इनकार
राष्ट्रीय

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: 2020 का मामला फिर खोलने से इनकार

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 2025 में दिए गए आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है।

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: 2020 का मामला फिर खोलने से इनकार
फोटो: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब CM भगवंत मान को दी राहत; 2020 का मामला फिर से खोलने से इनकार

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के मामले को फिर से शुरू करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अब मान एक जिम्मेदार पद पर हैं और वे अपने कर्तव्यों का पालन जिम्मेदारी से करेंगे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले को फिर से शुरू करने का कोई उचित कारण नहीं है, क्योंकि किसी को गंभीर चोट नहीं आई थी।


मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना ने कहा, "राजनीति में सभी दल नारेबाजी करते हैं। हम इस मामले को फिर से शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं।"


चंडीगढ़ प्रशासन की अपील

भगवंत मान सुप्रीम कोर्ट: चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 2025 में दिए गए आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है। इस मामले में चंडीगढ़ की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कहा कि मुख्यमंत्री मान के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में एक प्रकार का मिनी-ट्रायल कर लिया है और उनके पास मजबूत मामला है। कोर्ट ने इस पर ध्यान देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई निर्धारित की।


याद रहे कि जनवरी 2020 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री के निवास के बाहर बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किया गया था, जिसमें भगवंत मान भी शामिल थे। इस प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिस कर्मियों को हल्की चोटें आई थीं, जिसके बाद आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।


हाई कोर्ट का निर्णय

2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि पुलिसकर्मियों को आई चोटें गंभीर नहीं थीं और प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़ने से रोकने का पुलिस के पास कोई ठोस कारण नहीं था।


उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत उस दिन कोई निषेधाज्ञा लागू नहीं थी, इसलिए मामले को रद्द करने का कोई उचित आधार नहीं था। इसके परिणामस्वरूप, हाई कोर्ट ने मामला रद्द कर दिया था। हालांकि, अब चंडीगढ़ प्रशासन ने इस निर्णय को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।


Read This Also:- भाजपा संगठनात्मक बदलाव: संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी