सीजेपी पर लगे आरोपों का खंडन
भारतीय राजनीति में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक नई पहचान बना रही है। इस 'प्रेशर ग्रुप' पर आम आदमी पार्टी की बी टीम होने का आरोप लगाया जाता रहा है। इस संदर्भ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि अभिजीत दीपके, जो कुछ समय पहले तक आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े हुए थे, अब संगठन छोड़ चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत करते हुए कहा कि दीपके पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अमेरिका चले गए। मान ने जोर दिया कि आम आदमी पार्टी भारत के 140 करोड़ लोगों और पंजाब के 3.5 करोड़ लोगों की ए टीम है।
भाजपा की बी टीम पर पहले भी आरोप
भगवंत मान ने कहा कि सीजेपी को आम आदमी पार्टी की बी टीम बताने के आरोपों का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले आम आदमी पार्टी को भी भाजपा की बी टीम कहा जाता था। मान के अनुसार, यह आरोप राजनीतिक प्रतिकूलताओं का हिस्सा हैं और ऐसे आरोपों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह क्या होता है, लेकिन लोग अलग-अलग बातें करते रहते हैं।" मान ने अपने बयान में आम आदमी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान पर जोर दिया।
आम आदमी पार्टी की राजनीतिक पहचान
भगवंत मान ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि आम आदमी पार्टी की राजनीतिक पहचान पूरी तरह से अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया, "हम किसी की 'B-टीम' या 'C-टीम' नहीं हैं। हम देश के 140 करोड़ लोगों और पंजाब के 3.5 करोड़ लोगों की 'A-टीम' हैं। हम हमेशा पंजाब के लोगों के साथ खड़े रहेंगे।"
इसके अतिरिक्त, सीजेपी पर आम आदमी पार्टी के साथ संबंध रखने के आरोपों ने इस मुद्दे को और भी जटिल बना दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके के संबंधों के चलते ये आरोप और भी प्रबल हुए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद का संदर्भ
जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ, तब सीजेपी ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया था। उस समय पार्टी पर केवल भाजपा शासित राज्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। सत्ता समर्थक लोगों ने यह भी कहा कि सीजेपी जानबूझकर आम आदमी पार्टी या अन्य दलों के राज्यों में नहीं जा रही है।
इस दौरान, सौरव दास ने पंजाब में एक स्कूल का निरीक्षण किया और उसकी सराहना की। हालांकि, इस पर उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। यह स्थिति सीजेपी की राजनीतिक गतिविधियों को और अधिक विवादास्पद बना देती है।





