Assam UCC Bill: विवाह, तलाक और लिव-इन पर सख्त नियम
प्रस्तावित बिल में निजी जीवन से जुड़े कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसमें विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और बहुविवाह को लेकर नए नियम तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान सिविल ढांचा तैयार करना है, जिससे अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं को कम किया जा सके।
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
बिल के अनुसार, राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ऐसे संबंधों में पारदर्शिता आएगी और कानूनी विवादों को रोकने में मदद मिलेगी।
बहुविवाह पर पूरी तरह रोक का प्रस्ताव
इस विधेयक में बहुविवाह यानी एक से अधिक शादियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान रखा गया है। यदि यह कानून लागू होता है तो राज्य में कोई भी व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, और इसी कारण Assam UCC Bill में इसे शामिल किया गया है।
विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी
Marriage Law Changes: नए कानून के अनुसार, यदि विवाह करने वाले दोनों में से कोई एक भी असम का निवासी है, तो उस शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य सभी वैवाहिक संबंधों को कानूनी रूप से दर्ज करना और भविष्य में विवाद की स्थिति से बचाव करना है।
आदिवासी समुदाय को मिलेगा छूट
इस बिल का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि असम के आदिवासी (ट्राइबल) समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों की अपनी परंपराएं और सामाजिक संरचना होती है, जिन्हें देखते हुए उन्हें इस कानून से छूट दी गई है, इसी वजह से Assam UCC Bill में यह प्रावधान शामिल किया गया है।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बयान
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस बिल का विधानसभा में पेश होना इस बात पर औपचारिक चर्चा का रास्ता खोलता है कि असम में UCC की आवश्यकता क्यों है और यह किस तरह देश के विकास और एकरूपता में योगदान दे सकता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद
Assam Politics Debate: यह भी उल्लेखनीय है कि असम, भाजपा शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में कदम उठाने वाला तीसरा राज्य बन गया है। यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से यह विधेयक काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा ने 2026 विधानसभा चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में असम में UCC लागू करने का वादा किया था। इसी के तहत राज्य मंत्रिमंडल ने 13 मई को पहली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
विपक्ष का विरोध और आगे की प्रक्रिया
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इस विधेयक के पेश किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर सरकार ने किसी भी पक्ष या समुदाय से पर्याप्त परामर्श नहीं किया।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वनि मत के आधार पर इस बिल को सदन में पेश करने की अनुमति दे दी। अब सभी की नजर मंगलवार को होने वाली बहस और मतदान पर टिकी हुई है।
यह विधेयक असम की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यदि यह पारित होता है तो राज्य में निजी कानूनों में एकरूपता की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका असर न केवल असम बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।
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