भाजपा का संकल्प पत्र
भाजपा का संकल्प पत्र में कुल 31 वादे शामिल हैं। इसमें प्रमुख रूप से बांग्लादेशी मियाओं से जमीन वापस लेने, राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने, मूल निवासियों की जमीन और विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा 5 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का वादा किया गया है। भाजपा ने इसे राज्य में शांति और विकास को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने कहा, कि असम चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र स्थिरता और विकास पर आधारित है, बीजेपी के शासन के दौरान अवसरों में वृद्धि हुई है और राज्य के युवा अब अपने घर लौट रहे हैं।
कांग्रेस पर निशाना
संकल्प पत्र जारी करते समय सीतारमण ने कांग्रेस की नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 32 वर्षों के शासन के कारण असम को लंबे समय तक AFSPA के अधीन रहना पड़ा, जबकि भाजपा सरकार ने इसे ज्यादातर क्षेत्रों से हटाया। उनका दावा था कि भाजपा की नीतियों ने राज्य में स्थिरता और विकास के रास्ते खोले।
स्थानीय सुझावों पर आधारित घोषणापत्र
केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने बताया कि ‘संकल्प पत्र’ तैयार करने के पीछे व्यापक जन सहभागिता रही। पार्टी ने असम के विभिन्न हिस्सों में घर-घर जाकर लोगों के सुझाव जुटाए और उन्हें संकलित कर घोषणापत्र तैयार किया। सोनोवाल ने कहा कि करीब 3 लाख लोगों ने इसमें अपना योगदान दिया।
संकल्प पत्र जारी होने के समय मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
चुनाव की रूपरेखा
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगा, जबकि मतगणना 4 मई को आयोजित की जाएगी। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके शासन में विकास, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हुई है और अगले कार्यकाल में वे इसे और मजबूत करेंगे।
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