अमरदीप की संघर्षगाथा
क्या आपने फिल्म 'पान सिंह तोमर' देखी है? इस फिल्म में इरफान खान द्वारा निभाए गए पान सिंह का किरदार अपने जीते हुए मेडल के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचता है, लेकिन वहां उसे निराशा ही मिलती है। इसी तरह की एक कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें रांची के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की कठिनाइयों का जिक्र है।
अमरदीप का एक वीडियो जिसमें वह रांची में सब्जी बेचते हुए नजर आ रहे हैं, इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में ग्राहकों के लिए सब्जियों का वजन करते हुए, उनके पीछे दीवार पर लटके मेडल देखने को मिलते हैं, जो उन्होंने देश के लिए अपने खेल के दौरान जीते हैं।
खेल में उपलब्धियों के बावजूद आर्थिक कठिनाइयाँ
झारखंड के 29 वर्षीय अमरदीप कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए रांची में सब्जी बेचना पड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर वह कैब भी चलाते हैं।
अमरदीप ने 2013 में थ्रोबॉल खेलना शुरू किया था। उनके पास सुविधाओं का अभाव था और न ही कोई बड़ा सहारा था। लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अपने खेल में निखार लाया। 2015 में उन्हें जूनियर एशियन चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिला, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। यह उनकी जीवन की दिशा बदलने वाला क्षण था।
कर्ज और संघर्ष का सामना
अमरदीप की सफलता के बावजूद उनके परिवार को आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ा। उनके माता-पिता आज भी सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। अमरदीप के पिता के अनुसार, उन्हें बेटे को प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए कई बार कर्ज लेना पड़ा।
वह कहते हैं कि अपने बेटे के जुनून के लिए वे पीछे नहीं हटे, लेकिन हर प्रतियोगिता से पहले आर्थिक चिंता उन्हें परेशान करती रही। अमरदीप ने खेल में अपनी मेहनत को जीत में बदला, फिर भी स्थायी वित्तीय सहायता का अभाव रहा।
सरकार की पहल
अमरदीप की कहानी सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने उनकी मदद का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेल विभाग को निर्देश दिया है कि वे अमरदीप के मामले की समीक्षा करें और उचित कार्रवाई करें।
सरकार की इस पहल से अमरदीप और उनके परिवार को उम्मीद है कि उनकी कठिनाइयों का समाधान होगा, जिससे वह अपने खेल में और अधिक प्रगति कर सकें।





