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प्रधानमंत्री आवास के निकट मस्जिद को तोड़ने के आदेश के खिलाफ ओवैसी की पार्टी ने वक्फ बोर्ड से की अपील

ओवैसी की पार्टी ने मस्जिद और कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने की मांग की।

प्रधानमंत्री आवास के निकट मस्जिद को तोड़ने के आदेश के खिलाफ ओवैसी की पार्टी ने वक्फ बोर्ड से की अपील
फोटो: AIMIM Appeals to Waqf Board Against Demolition Order of Mosque Near PM's Residence

मस्जिद की सुरक्षा को लेकर बढ़ा विवाद

प्रधानमंत्री आवास के निकट स्थित एक पुरानी मस्जिद को तोड़ने के आदेश ने विवाद को जन्म दे दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात की और मस्जिद के साथ-साथ इसके सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।


प्रतिनिधिमंडल ने वक्फ बोर्ड से अनुरोध किया कि वह इस धार्मिक स्थल की सुरक्षा हेतु आवश्यक कानूनी कदम उठाए और जब तक सक्षम प्राधिकारी रिकॉर्ड और कानूनी दावों की जांच नहीं कर लेते, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ को रोका जाए।


1977 के गजट का हवाला देते हुए ज्ञापन

AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमानी ने वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 8 सितंबर 1977 के दिल्ली गजट नोटिफिकेशन का उल्लेख किया गया है, जिसमें इस मस्जिद और कब्रिस्तान का विवरण दिया गया है, जो लगभग दो बीघा में फैला हुआ है।


उन्होंने वक्फ बोर्ड से यह भी आग्रह किया कि इस मामले में तोड़फोड़ की कार्रवाई की जांच की जाए और मस्जिद समिति को कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अधिकार और दस्तावेज प्रदान किए जाएं।


विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

AIMIM के कार्यकर्ताओं ने वक्फ बोर्ड कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया, जिसमें उन्होंने CEO के नकारात्मक रवैये की आलोचना की।


वहीं, अधिकारियों ने रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने का नोटिस जारी किया है और इसकी पानी एवं बिजली की आपूर्ति भी काट दी गई है। इस निर्णय का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं।


महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''प्रधानमंत्री मुस्लिम देशों में मस्जिदों का दौरा करते हैं और उनकी भव्यता की सराहना करते हैं, लेकिन अपने ही देश में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित 120 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है। यह विरोधाभास वास्तव में हैरान करने वाला है।''