सुरक्षा बलों का उपयोग और प्रदर्शन की रोकथाम
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का उपयोग देश की सीमाओं की सुरक्षा के बजाय अपने नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जा रहा है। दीपके ने एक्स पर लिखा, "मोदी सरकार देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता सीमाओं की सुरक्षा होनी चाहिए, न कि दिल्ली को किले में बदलकर प्रदर्शनकारियों को रोका जाना चाहिए।
जयराम रमेश के आरोपों का संदर्भ
यह बयान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश द्वारा चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर उठाए गए सवालों के संदर्भ में आया है। रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चीन के सामने रियायतें दे रही है और अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर जारी तनाव के संबंध में चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने कहा कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश में गश्त करने वाले कुछ स्थानों तक अपनी पहुंच खो दी है। हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हुई झड़पों के दौरान बल के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
शिवसेना के नेताओं द्वारा भी उठाए गए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी चीन के साथ भारत के संबंधों और सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की जिम्मेदारी है कि वे देश की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करें।
चतुर्वेदी ने कहा कि एक ओर चीन के साथ संबंध सामान्य करने की बात की जाती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे बयान सामने आते हैं जो इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा, संवेदनशील हितों और राष्ट्रीय हित से जुड़ा है, इसलिए इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं की जवाबदेही की मांग
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर चीन के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं के दौरान भारतीय बल के प्रदर्शन की सराहना की है, फिर भी प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने इस मामले पर चुप्पी बनाए रखी है।
इन बयानों के माध्यम से विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की चीन नीति और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही की मांग की है।





