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'ना मोदी रहेंगे, ना ज्ञानेश...': विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच संसद मार्ग पर गरमाई सियासत, इस्तीफे की मांग तेज

विपक्ष का दिल्ली में कड़ा विरोध, लोकतंत्र बचाने की मांग और इस्तीफे पर हंगामा।

'ना मोदी रहेंगे, ना ज्ञानेश...': विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच संसद मार्ग पर गरमाई सियासत, इस्तीफे की मांग तेज
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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। हाल ही में सामने आए एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के वीडियो और भाषण ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्ष द्वारा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के नाम पर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिसमें केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले बोले जा रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार चाहे जितनी भी बैरिकेडिंग कर ले, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

"इस दौर के अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हुआ है गांधी"

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार की तुलना अंग्रेजों से की। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि जिस तरह ब्रिटिश शासन के खिलाफ महात्मा गांधी खड़े हुए थे, उसी प्रकार आज के दौर के तथाकथित 'अंग्रेजों' के खिलाफ इस दौर का 'गांधी' उठ खड़ा हुआ है। विपक्ष का यह साफ तौर पर कहना था कि देश के संविधान और लोकतंत्र को कोई भी ताकत लूट नहीं सकती। नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा, "ना मोदी रहेंगे, ना तो ज्ञानेश रहेगा। यह देश था, यह देश है और यह देश रहेगा।"

चुनाव आयोग और सरकार पर गंभीर सवाल

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (संभवतः ज्ञानेश कुमार की ओर इशारा करते हुए) पर तीखा हमला बोला और उनके इस्तीफे की मांग की। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग पर जब भी गंभीर आरोप लगते हैं, तब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता आकर सफाई क्यों देते हैं? उन्होंने इस रिश्ते पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को बाहर आकर मीडिया और देश की जनता के सवालों का सामना करना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि लोकतंत्र को खत्म करने की बात क्यों हो रही है।

"सरकार विपक्ष की हर आवाज से डरी हुई है"

विपक्ष का आरोप है कि वर्तमान सरकार लोकतंत्र की हर उस आवाज से डरती है जो संविधान को बचाने के लिए उठ खड़ी होती है। चाहे वह छात्रों का मार्च हो, सांसदों का विरोध प्रदर्शन हो या विपक्ष का कोई अन्य कदम, सरकार हर तरफ से भयभीत नजर आती है। पुलिस द्वारा रोके जाने और बैरिकेडिंग लगाने पर तंज कसते हुए नेताओं ने कहा कि वे रुकने वाले नहीं हैं—अगर उन्हें चुनाव आयोग जाने से रोका जाएगा, तो वे आकाशवाणी भवन या प्रधानमंत्री आवास की ओर रुख करेंगे।

लाठी-डंडों और जेल से नहीं डरेगा विपक्ष

अपने संबोधन और नारों के जरिए नेताओं ने साफ कर दिया कि वे किसी भी दमनकारी कार्रवाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पुलिस प्रशासन ने बल प्रयोग किया या किसी नेता को खरोंच भी आई, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम होंगे। प्रदर्शनकारियों ने जोश के साथ नारे लगाए— "ये दीवाने कहां चले, जेल चले भाई जेल चले।" अंत में, विपक्ष ने यह संकल्प दोहराया कि वे आखिरी सांस तक देश के संविधान, लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बचाने के लिए सड़क से लेकर संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
 

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