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वोटर लिस्ट में बड़ी धांधली: मृत लोगों द्वारा नाम कटवाने के आवेदन और फर्जी वोटिंग पर उठे सवाल

वोटर लिस्ट में मृत लोगों द्वारा फॉर्म 7 भरने, गायब आंकड़ों और फर्जी मतदाताओं के मामलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

वोटर लिस्ट में बड़ी धांधली: मृत लोगों द्वारा नाम कटवाने के आवेदन और फर्जी वोटिंग पर उठे सवाल
फोटो: Voter List Manipulation, Election Commission, Form 7, Mahadevapura, Karnataka Electoral Roll

नई दिल्ली/बेंगलुरु: देश की मतदाता सूचियों (Voter List) में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के सिस्टम में कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जो पूरी प्रक्रिया को संदेहास्पद बनाती हैं। कम से कम 37 लोगों ने फॉर्म 7 भरकर खुद को मृत घोषित कर अपना नाम वोटर लिस्ट से हटाने की मांग की है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 3 फॉर्म तब भरे गए जब ड्राफ्ट लिस्ट छप चुकी थी, यानी जिन लोगों को लिस्ट में जिंदा दर्ज किया गया, उन्होंने ही बाद में अपनी मौत की अर्जी दे दी।

इसके अलावा, रिपोर्ट में 334 ऐसे जोड़ों का जिक्र है जिन्होंने एक-दूसरे को मृत बताकर नाम काटने के लिए फॉर्म भरे। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद अब कर्नाटक में भी इसी तरह के पैटर्न देखे जा रहे हैं।

 

गायब आंकड़े और पारदर्शिता का अभाव

कर्नाटक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आंकड़ों और वेबसाइट पर अपलोड फॉर्म 10 के आंकड़ों में भारी अंतर मिला है। सीईओ के मुताबिक 16 जून से 28 अगस्त के बीच 1,10,654 फॉर्म 7 भरे गए, जबकि पोर्टल पर सिर्फ 81,822 फॉर्म ही दिखे, जिससे 28,832 फॉर्मों का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, चुनाव आयोग ने कर्नाटक में फॉर्म 7 का डेटा ही वेबसाइट से हटा दिया है, जिससे स्वतंत्र जांच पर रोक लग गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फॉर्म 7 के ज्यादातर आवेदन विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आए। कोपा तालुक में स्थानीय नेताओं द्वारा 243 वोटरों के नाम काटने के आवेदन दिए जाने का मामला भी सामने आया था, जिस पर हंगामे के बाद आपत्तियां वापस ली गईं।

 

महादेवपुरा में फर्जी वोटिंग का बड़ा खेल

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी सिर्फ नाम काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी वोट जोड़ने के भी गंभीर आरोप हैं। बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर राहुल गांधी की टीम की जांच में 6.5 लाख में से 1,250 नाम फर्जी पाए गए। एक ही पते पर दर्जनों लोगों का होना, हाउस नंबर 'शून्य' होना और गलत तस्वीरें दर्ज होना आम बात बन गई थी।

आउटर रिंग रोड के पास 10-15 वर्ग फीट के एक छोटे से घर (जो कि एक स्थानीय नेता का है) में 80 वोटर्स रजिस्टर्ड पाए गए। विश्लेषकों का मानना है कि इन सुनियोजित गड़बड़ियों के कारण ही 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी को 1,14,000 से अधिक की भारी बढ़त मिली, जिसने पूरे लोकसभा क्षेत्र का समीकरण बदल दिया।

जब देश के लोकतंत्र की रीढ़ यानी मतदाता सूची में ही ऐसी खामियां और जवाबदेही की कमी दिखने लगे, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/Xwq58kj0wdk?si=Lze408TfOOUWbUAE

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