दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने, प्रक्रिया की जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
चुनाव आयोग के खिलाफ उठे सवाल
वीडियो में प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर जुटते दिखाई देते हैं। प्रदर्शन में छात्र, मजदूर, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान कई राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े सवाल सामने आए हैं और वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने या गलत दर्ज होने की शिकायतें मिली हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा था कि विभिन्न राज्यों में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में काम करने के लिए पलायन करने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से क्यों गायब हो रहे हैं। हालांकि, वीडियो में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि SIR के बाद मतदाताओं को मिले पहचान पत्रों में नाम और अन्य विवरण गलत दर्ज थे। उन्होंने प्रक्रिया में सुधार के लिए पर्याप्त समय देने और शिकायतों की सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ वक्ताओं ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति और SIR से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
वीडियो में माकपा नेता वृंदा करात और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। वृंदा करात ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के बजाय उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसदीय कार्रवाई की मांग का भी उल्लेख किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया की जांच कराने और विवादित प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
पुलिस की बैरिकेडिंग, प्रदर्शनकारियों को हटाया
चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से घोषणा कर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने को कहा और चेतावनी दी कि प्रदर्शन जारी रहने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है।
वीडियो के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और बाद में उन्हें सड़क से हटाना शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे के साथ नारे लगाए और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की बात कही।
प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और अन्य निर्धारित स्थलों पर अनुमति लेने की प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में मताधिकार की सुरक्षा और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
यह प्रदर्शन SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों को सामने लाता है। हालांकि, प्रदर्शन में लगाए गए आरोपों और दावों की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
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