संदीप दीक्षित ने कहा कि एक आम आदमी के लिए ऐसा महल जैसा घर बनवाना कतई ठीक नहीं है। उन्होंने केजरीवाल के बारे में और भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘यह मुख्यमंत्री किस तरह का आम आदमी हैं जो इस तरह के महल जैसे आलीशान घर में रहते हैं?’’ उन्होंने यह भी सवाल किया कि केजरीवाल के घर में मिनी बार क्यों है? अगर वहां कोल्ड ड्रिंक, जलजीरा या लस्सी रखी जाती तो बात और होती, लेकिन मिनी बार का होना साफ बताता है कि केजरीवाल का राजनीति में आने का उद्देश्य सिर्फ अय्याशी करना था।
पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना पर संदीप दीक्षित ने केजरीवाल के इरादों पर निशाना साधते हुए कहा कि इस योजना को उन्होंने पिछले 10 सालों तक क्यों नहीं शुरू किया? दीक्षित ने कहा कि यह योजना सिर्फ वोट की राजनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मंदिरों और गुरुद्वारों में प्रचार करना और वहां के पुजारियों और ग्रंथियों को अपने पक्ष में करना है।
दीक्षित का यह भी कहना था कि केजरीवाल केवल पंडितों और ग्रंथियों को अपने कार्यकर्ता बनाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं, ताकि उनका राजनीतिक फायदा हो सके।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और यमुना नदी के गंभीर हालात पर भी संदीप दीक्षित ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पर प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों के जीवन की औसत उम्र कम हो रही है, और इस पर मुकदमा चलाना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषित हवा के कारण दिल्लीवाले 5-6 साल तक कम जी रहे हैं। उन्होंने यमुना के प्रदूषण की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई, कहकर कि अब लोग यमुना को छूने से भी डरते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘अगर दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष यमुना में डुबकी लगाने गए थे और उन्हें आईसीयू में भर्ती होना पड़ा, तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यमुना की स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है।’’
संदीप दीक्षित ने केजरीवाल की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘चुनाव आते ही केजरीवाल कभी खांसी वाले आम आदमी तो कभी मफलर वाले आम आदमी बन जाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि चुनावी जीत के लिए केजरीवाल को अगर मुर्गा भी बनना पड़े तो वह वह भी कर सकते हैं। इस तरह के बयान से दीक्षित ने यह साबित करने की कोशिश की कि केजरीवाल के चुनावी वादे और बयान केवल राजनीति के लिए होते हैं और इनका असली उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है।
दीक्षित ने पूरी बात को समेटते हुए कहा कि दिल्ली सरकार की विफलताओं को उजागर करने का यह समय है और दिल्ली के लोग अब यह समझने लगे हैं कि केजरीवाल की असली राजनीति क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आम आदमी पार्टी के पास कोई ठोस योजना होती तो वह इन चुनावी वादों से दूर रहते और असल मुद्दों पर काम करते।





